नई दिल्ली: करीब दो दशकों तक चली लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार अपने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। इस ऐतिहासिक डील की औपचारिक घोषणा 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की गई, जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की।
25% वैश्विक GDP को कवर करने वाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
इस समझौते को वैश्विक व्यापार इतिहास की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह दुनिया की करीब 25% GDP का प्रतिनिधित्व करता है। यह डील भारत-EU संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग को नई ऊंचाई देगी।
शराब, बीयर और जैतून का तेल होंगे सस्ते
आम उपभोक्ताओं के लिए इस समझौते का सबसे बड़ा असर यूरोपीय शराब, बीयर और जैतून के तेल पर दिखेगा।
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Wine पर टैक्स 150% से घटकर 20–30%
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Beer पर शुल्क 110% से घटकर 50%
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Spirit पर शुल्क 40%
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Olive Oil और अन्य वनस्पति तेलों पर शून्य शुल्क
इससे भारत के प्रीमियम फूड और अल्कोहल मार्केट में प्रतिस्पर्धा और विकल्प बढ़ेंगे।
कार, मशीनरी और एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत
भारत ने यूरोपीय कारों के लिए 2.5 लाख वाहनों के वार्षिक कोटा के साथ आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से 10% तक लाने पर सहमति दी है।
इसके अलावा—
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मशीनरी पर 44% तक का टैक्स
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रसायनों पर 22% टैक्स
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विमान और अंतरिक्ष यान से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर टैरिफ
अब लगभग समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे भारत के एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।
कारों और दवाओं की कीमतों में बड़ी राहत
भारत-यूरोप ट्रेड डील के तहत सबसे अहम फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर लिया गया है। समझौते के अनुसार, यूरोपीय देशों से आयात होने वाली लग्जरी कारों और मोटर वाहनों पर लगने वाला भारी भरकम शुल्क अब 110 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 10 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, इसके लिए सालाना 2.5 लाख वाहनों की सीमा तय की गई है।
इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र को भी बड़ी राहत दी गई है। मशीनरी पर लगने वाला 44 प्रतिशत तक का आयात शुल्क अब लगभग समाप्त कर दिया जाएगा। रसायन (केमिकल) सेक्टर में भी बड़ा बदलाव हुआ है, जहां 22 प्रतिशत तक के टैक्स को लगभग खत्म करने का फैसला लिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिहाज से अहम फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर लगने वाला 11 प्रतिशत तक का आयात शुल्क भी ज्यादातर हटा दिया गया है, जिससे दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। वहीं एविएशन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर टैक्स खत्म कर दिया गया है।
ग्रीन एनर्जी के लिए 500 मिलियन यूरो की मदद
इस व्यापार समझौते का एक अहम पहलू जलवायु परिवर्तन सहयोग भी है। यूरोपीय संघ भारत को अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो (करीब 4,500 करोड़ रुपये) की सहायता देगा। यह राशि कार्बन उत्सर्जन कम करने, हरित उद्योग और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। इसके लिए 2026 की पहली छमाही में क्लाइमेट एक्शन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा।
अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया
इस डील के बीच अमेरिका से सियासी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक मंत्री ने कहा कि “यूरोप अपने ही खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है”, जिससे इस समझौते की वैश्विक रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।













