इंदौर: इंदौर में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें टीबी रोगी अजय सोनी को ब्राउन शुगर तस्कर बताकर जेल भेजा गया। अजय की जेल में मौत हो गई, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई। कोर्ट ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एमआईजी थाना के 9 पुलिसकर्मियों पर जांच बैठा दी है।
गंभीर बीमारी के बावजूद जेल में भेजा गया
जानकारी के मुताबिक, अजय सोनी गंभीर टीबी रोगी था। डॉक्टर ने उसे आराम और इलाज के लिए घर भेजा था। बावजूद इसके, 15 नवंबर 2024 को एमआईजी थाना पुलिस ने अजय को उसके घर से उठाया और अवैध वसूली और झूठे एनडीपीएस मामले में जेल भेज दिया।
कोर्ट ने पुलिस पर बैठाई जांच
अजय की जेल में मौत के बाद बहन और परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत 9 पुलिसकर्मियों पर जांच का आदेश दे दिया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने झूठे एनडीपीएस मामले में अजय को जेल भेजकर उसकी जान जोखिम में डाली।
पुलिस की लापरवाही और परिवार की गुहार
परिवार ने बताया कि पुलिस ने उनकी सुनवाई तक नहीं की। बहन ने कोर्ट में कहा कि भाई गंभीर बीमारी से पीड़ित था, और उसे जेल भेजना जानलेवा साबित हुआ। कोर्ट ने मामले की जांच का आदेश देते हुए पुलिस कर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
पूरे मामले का महत्व
यह घटना टीबी रोगियों और गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाती है। वहीं, पुलिस प्रशासन की अनुचित कार्रवाई और झूठे मामलों में गिरफ्तारी की प्रवृत्ति को उजागर करती है।
आगे की कार्रवाई
कोर्ट की जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। परिवार का मानना है कि अजय की मौत की जिम्मेदारी सीधे पुलिस प्रशासन पर है।अजय सोनी की मौत ने इंदौर में पुलिस की कार्यप्रणाली और न्यायिक संरक्षण के महत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









