Sarpanch Dictatorship PM Awas Scam : सिंगरौली (फूटाहड़वा): मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर अंतिम छोर के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं सिंगरौली की ग्राम पंचायत फूटाहड़वा (टोला चरौंटी) में एक जनप्रतिनिधि के अहंकार ने इन दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। यहाँ एक पात्र और अत्यंत गरीब महिला फुलकेशा विश्वकर्मा को आवास योजना से सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की हिम्मत की थी।
“शिकायत की तो कुछ नहीं मिलेगा” पीड़िता फुलकेशा और उनके पति रामपति विश्वकर्मा का आरोप है कि वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए पूरी तरह पात्र हैं। वर्षों से कच्चे मकान में गुजर-बसर कर रहे इस परिवार ने जब सरपंच राजेंद्र सिंह से आवास न मिलने का कारण पूछा, तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर दुत्कार दिया गया कि “तुम हमारे खिलाफ शिकायत करती हो, इसलिए तुम्हें न आवास मिलेगा और न ही शासन की किसी अन्य योजना का लाभ।”
जनप्रतिनिधि तय कर रहे हैसियत: यह मामला केवल एक महिला के अधिकार का नहीं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग का है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी योजनाएं नियमावली से चलेंगी या किसी व्यक्ति की पसंद-नापसंद से? किसी भी पात्र हितग्राही को व्यक्तिगत रंजिश के आधार पर सूची से बाहर रखना भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा: पीड़िता ने अब जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से न्याय की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि सरपंच द्वारा दी गई धमकी की जांच हो, उनके परिवार को तत्काल आवास स्वीकृत किया जाए और पद का दुरुपयोग करने वाले सरपंच पर कड़ी कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि सिंगरौली प्रशासन इस गरीब महिला के साथ खड़ा होता है या भ्रष्टाचार की यह फाइल भी दफ्तरों की धूल फांकेगी।









