Sarai Railway Station : सिंगरौली (सरई): सिंगरौली जिले का प्रमुख आवागमन केंद्र सरई रेलवे स्टेशन इन दिनों यात्रियों की सुविधा के बजाय कोयले के प्रदूषण के लिए सुर्खियों में है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो को पूरी तरह से कोल यार्ड बना दिया गया है। यहाँ खुले में कोयले का भंडारण और लोडिंग-अनलोडिंग होने के कारण पूरा स्टेशन परिसर काली धूल की चपेट में है, जिससे यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
स्वास्थ्य पर गहरा संकट: स्टेशन परिसर में कोयले की धूल (Coal Dust) उड़ने से यहाँ आने वाले हजारों यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी जानलेवा साबित हो रही है। नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इस तरह का भंडारण प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ नियमों को ठेंगे पर रखा गया है।
प्रशासन और नेताओं की चुप्पी पर सवाल: स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि यह कोल यार्ड एक रसूखदार कॉर्पोरेट समूह का है, जिसके दबाव में जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चुप्पी साध रखी है। लोगों का कहना है कि स्टेशन के पास अन्य विकल्प होने के बावजूद प्लेटफॉर्म का चयन केवल अपनी लागत कम करने के लिए किया गया है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
आंदोलन की आहट: सरई के सामाजिक संगठनों और निवासियों ने रेलवे प्रबंधन और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्लेटफॉर्म नंबर दो से कोयले का भंडारण नहीं हटाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। उनकी मांग है कि कोल यार्ड को आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बंद हो सके।













