MP Employees Protest 2026 : भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार, 15 जनवरी को ‘तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ’ के आह्वान पर राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन सहित प्रदेश के सभी 55 जिला मुख्यालयों पर विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर अल्टीमेटम दिया।
11 सूत्रीय मांगें: ’70-80-90′ वेतन फॉर्मूले का विरोध कर्मचारियों की इस लड़ाई में 11 प्रमुख मांगें शामिल हैं। सबसे बड़ा विरोध नई नियुक्तियों में लागू 70%, 80% और 90% वेतन व्यवस्था को लेकर है, जिसे कर्मचारी ‘शोषण’ बता रहे हैं और इसे तुरंत समाप्त कर 100% वेतन देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और पदोन्नति की रुकी हुई प्रक्रिया को बहाल करना भी प्राथमिकता में है।
प्रमुख मांगें एक नजर में:
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वेतन विसंगति: परिवीक्षा अवधि में कम वेतन की व्यवस्था खत्म करना।
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भत्ता: केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों को महंगाई राहत (DR)।
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नियमितीकरण: आउटसोर्स, संविदा और स्थाई कर्मियों को नियमित करना।
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छूट: सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा की अनिवार्यता से राहत और ई-अटेंडेंस व्यवस्था से मुक्ति।
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पेंशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः लागू करना।
नेताओं का कड़ा रुख: शासकीय वाहन चालक कर्मचारी यांत्रिकी संघ के प्रदेश अध्यक्ष साबिर खान, नगर निगम प्रभारी कर्मचारी संघ के नवल गोरे और कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुशीर मोहम्मद ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्मचारी लंबे समय से धैर्य रखे हुए हैं, लेकिन अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है।









