ED vs Mamata Banerjee : नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। ₹2,742.32 करोड़ के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बंगाल पुलिस के आला अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की है।
छापेमारी और विवाद: 8 जनवरी 2026 को ईडी ने कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर स्थित I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर में दबिश दी थी। ईडी का आरोप है कि कोयला घोटाले के ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे हैं।
गंभीर आरोप: ईडी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं और सर्च ऑपरेशन में बाधा डाली। आरोप है कि जब्त लैपटॉप और मोबाइल फोन पुलिस ने दो घंटे तक अपनी कस्टडी में रखे, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है।
ED अधिकारियों पर FIR: घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही चार अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कर दी है, जिसे एजेंसी ने “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई” बताया है।
सुप्रीम कोर्ट से मांग: ईडी ने अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगाने, डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक सुरक्षा देने और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र CBI जांच कराने की अपील की है।
वहीं, I-PAC ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है और किसी भी राजनीतिक डेटा की जब्ती नहीं हुई है।













