Friday, August 21, 2026
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C.G News : छत्तीसगढ़ में विमुक्त-घुमंतु जनजातियों के विकास के लिए प्राधिकरण गठन की मांग, नट समाज ने CM साय को लिखा पत्र

रायपुर: प्रदेश के पिछड़े और निर्धन घुमंतु जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘विमुक्त, घुमंतु और अर्द्धघुमंतु विकास प्राधिकरण’ गठन की मांग जोर पकड़ रही है। प्रदेश नट समाज विकास सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमारनर ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ को पत्र भेजकर इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है।

कौन हैं लक्षित समुदाय

पत्र के अनुसार, नट, सपेरा, देवार, भूमिया, भडरी, बेलदार जैसी जातियाँ छत्तीसगढ़ में ऐसे समुदायों की श्रेणी में आती हैं, जो आदिकाल से घूम घूमकर जीवन यापन करते आए हैं। ये जनजातियाँ विकास की मुख्य धारा से दूर हैं और इनके शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में गंभीर कमी है।

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मध्य प्रदेश मॉडल को आधार बनाकर प्राधिकरण गठन

सुरेश कुमारनर ने पत्र में उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने 22 जून 2011 को विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध घुमंतू जनजातीय कल्याण विभाग गठित किया था। छत्तीसगढ़ में भी इसी मॉडल को अपनाते हुए, इन समुदायों के लिए अलग प्राधिकरण और वार्षिक बजट प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अलग श्रेणी में वर्गीकरण की जरूरत

पत्र में यह भी कहा गया कि जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग राज्य में वर्गीकृत हैं, वैसे ही विमुक्त और घुमंतु जातियों को अलग श्रेणी में शामिल किया जाए ताकि उनके विकास और कल्याण की योजना प्रभावी ढंग से बनाई जा सके।

व्यापक विकास और न्याय की उम्मीद

प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इन समुदायों के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए त्वरित पहल की जाए। उन्होंने आशा जताई कि प्राधिकरण गठन से यह समुदाय भी राज्य की विकास मुख्यधारा से जुड़ सकेगा और उनके अधिकार सुनिश्चित होंगे।

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