भोपाल : मध्य प्रदेश में सिर्फ शहरों ही नहीं, बल्कि गांवों के स्कूलों, आंगनवाड़ियों और अस्पतालों में भी लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जल शक्ति मंत्रालय की Functionality Assessment of Household Tap Connections (FAHTC) 2024 रिपोर्ट ने राज्य में सार्वजनिक संस्थानों की जल व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर पेश की है।
52 जिलों में हुआ था व्यापक सर्वे
यह सर्वे प्रदेश के 52 जिलों के 1271 गांवों में स्थित स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में केवल 58.3% सार्वजनिक संस्थानों में ही नल से पानी की सुविधा उपलब्ध है, जबकि देश का औसत 68% है।
स्वास्थ्य केंद्रों में हालात सबसे खराब
सबसे गंभीर स्थिति अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की सामने आई है। NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की जांच में पाया गया कि राज्य के केवल 12% स्वास्थ्य संस्थानों में ही पानी मानकों पर खरा उतरता है, जबकि 88% केंद्रों में दूषित पानी पाया गया। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से बेहद नीचे है।
सिर्फ़ शहरों में ही नहीं, मध्य प्रदेश में स्कूलों, आंगनवाड़ियों और अस्पतालों में पिलाया जा रहा दूषित पानी !
जल शक्ति मंत्रालय की Functionality Assessment of Household Tap Connections (FAHTC) 2024 रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में सार्वजनिक संस्थानों में पीने के पानी की बेहद… pic.twitter.com/DFFokKYfD3
— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 5, 2026
आंगनवाड़ी और स्कूल भी सुरक्षित नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों में सिर्फ 63.6% स्थानों पर ही साफ पेयजल उपलब्ध है। यह स्थिति बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
इंदौर हादसे ने बढ़ाई चिंता
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की घटना के बाद यह रिपोर्ट और भी गंभीर हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि ये घटनाएं सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता निगरानी, पाइपलाइन रखरखाव और जवाबदेही की अनदेखी का नतीजा हैं।
दावे बनाम हकीकत
राज्य सरकार ने घरों में नल कनेक्शन की संख्या पर जोर दिया, लेकिन स्कूलों, आंगनवाड़ियों और अस्पतालों तक सुरक्षित पानी पहुंचाने में नाकामी साफ दिख रही है। जबकि यही संस्थान समाज के सबसे कमजोर वर्ग की रक्षा की पहली जिम्मेदारी निभाते हैं।











