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Politics : बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह की हुंकार, अधीर रंजन पहुंचे PM मोदी के दरबार

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कोलकाता/नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। एक ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल दौरे पर हैं और ममता बनर्जी सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाया है।

अमित शाह का ममता सरकार पर सीधा हमला

कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा कि बीजेपी बंगाल की जनता से वादा करती है कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार बनने पर बंगाल को घुसपैठ मुक्त बनाया जाएगा और बांग्लादेश सीमा पर ऐसी मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड तैयार होगी कि “परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।”

घुसपैठ को चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान

अमित शाह ने साफ कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव घुसपैठ रोकने और अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर करने के मुद्दे पर लड़े जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता सरकार बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी के लिए जमीन नहीं दे रही है, ताकि आबादी का संतुलन बदला जा सके और वोट बैंक मजबूत किया जा सके।

14 साल से डर और भ्रष्टाचार का आरोप

गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 14 वर्षों में पश्चिम बंगाल की पहचान डर, भ्रष्टाचार और कुशासन से जुड़ गई है। पीएम मोदी की योजनाएं यहां टोल सिंडिकेट की भेंट चढ़ रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2026 के बाद बीजेपी सरकार बनने पर विकास, विरासत और गरीब कल्याण को प्राथमिकता दी जाएगी।

अधीर रंजन ने उठाया प्रवासी मजदूरों का मुद्दा

इधर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाली भाषा बोलने के कारण मजदूरों को बांग्लादेशी समझकर निशाना बनाया जा रहा है।

उत्पीड़न के 1,143 मामले सामने आए

अधीर रंजन के मुताबिक, पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड को बीते 10 महीनों में उत्पीड़न की 1,143 शिकायतें मिली हैं, जिनमें अधिकांश मामले बीजेपी शासित राज्यों से जुड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है और केंद्र सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

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