C.G Liquor Scam : ED की फाइनल चार्जशीट में फंसे डिप्टी कमिश्नरआशीष श्रीवास्तव, निलंबन तय! अफसरों पर गाज

रायपुर :  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाते हुए विशेष अदालत में करीब 29 हजार 800 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। इस चार्जशीट में आबकारी विभाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आशीष श्रीवास्तव का नाम भी जोड़ा गया है, जो इससे पहले ईओडब्ल्यू (EOW) की चार्जशीट में शामिल नहीं थे। चार्जशीट दाखिल होते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई हो सकती है।

चार्जशीट में नया नाम, कार्रवाई के संकेत

सूत्रों के मुताबिक, सचिव सह आयुक्त आर. संगीता के 3 जनवरी को अवकाश से लौटने के बाद आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं, इस केस में आरोपी बनाए गए 31 अधिकारियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। ईडी ने अब तक 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है, जिसमें कुछ अधिकारियों की पत्नियों के खातों में मिले संदिग्ध लेन-देन भी शामिल हैं।

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90 करोड़ की रिश्वत की बंदरबांट

ईडी और जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि शराब घोटाले के जरिए अधिकारियों में करीब 90 करोड़ रुपये की रिश्वत बांटी गई। इसमें पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को करीब 18 करोड़, इकबाल खान को 12 करोड़, नोहर सिंह ठाकुर को 11 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.7 करोड़ सहित कई अधिकारियों को करोड़ों रुपये की अवैध राशि मिलने के सबूत मिले हैं। आशीष श्रीवास्तव को भी 54 लाख रुपये दिए जाने के प्रमाण ईडी को प्राप्त हुए हैं।

करोड़ों की संपत्ति और एफडी पर सवाल

ईडी ने कई अफसरों की अचल और चल संपत्तियों के साथ-साथ करोड़ों की एफडी भी अटैच की है। जांच में यह भी सामने आया कि अधिकतर अधिकारियों के पास आय से कहीं अधिक संपत्ति है। जहां औसतन वेतन 1 से 1.5 लाख रुपये महीना है, वहीं कई अधिकारियों के पास 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति पाई गई है। ऐसे में इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग केस भी चलेगा।

बहाली का रास्ता बंद

ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में पहले 29 अधिकारी आरोपी थे, जिनमें से 22 को जुलाई 2025 में सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि 7 अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। अब ईडी की अंतिम कंप्लेन दाखिल होने के बाद इन अधिकारियों की बहाली लगभग असंभव मानी जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई राहत मिल सकती है। जिन अधिकारियों के खाते सीज हैं, उन्हें वेतन पाने के लिए भी अदालत की अनुमति लेनी होगी।

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