Jhiram incident war of words : रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में झीरम घाटी हत्याकांड का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा इस कांड में कांग्रेस की संलिप्तता के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। बघेल ने नड्डा के दावों को शहीदों का अपमान बताते हुए उन्हें ‘पर्ची अध्यक्ष’ करार दिया और मांग की कि एनआईए (NIA) को जेपी नड्डा से पूछताछ कर उनके दावों के सबूत मांगने चाहिए।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हमलावर होते हुए कहा कि जिस हमले में कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेताओं की पूरी पीढ़ी को खो दिया, उसे लेकर ‘सांठगांठ’ का आरोप लगाना शहादत का अपमान है। बघेल ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सरकार इस हत्याकांड के पीछे के षड्यंत्रकारियों का पता लगाना चाहती थी, तब भाजपा ने अदालतों में याचिकाएं लगाकर जांच क्यों रुकवाई? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 15 साल की रमन सरकार में नक्सलवाद खत्म होने के बजाय आदिवासियों का जनसंहार हुआ और 700 गांव खाली हो गए।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जेपी नड्डा से सार्वजनिक माफी की मांग की है। बैज ने कहा कि घटना के समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और नक्सलियों की चेतावनी के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए, इसका जवाब आज तक नहीं मिला है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा सरकार सरेंडर कर चुके नक्सलियों से सच नहीं उगलवा पा रही है, तो कांग्रेस को अनुमति दी जाए, हम सच्चाई देश के सामने लाएंगे।
बैज ने यह भी आरोप लगाया कि झीरम घाटी कांड तत्कालीन सरकार की विफलता और ‘टारगेट किलिंग’ का हिस्सा था। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब हमले में शामिल सभी नक्सली आज पुलिस की गिरफ्त में या सरेंडर कर चुके हैं, तो सरकार अब तक असली षड्यंत्रकारियों के नाम क्यों नहीं उजागर कर पाई? इस जुबानी जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में झीरम का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में और गरमाने वाला है।











