Traffic jam : विंध्यनगर (सिंगरौली)। ऊर्जाधानी के हृदय स्थल कहे जाने वाले विंध्यनगर क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। एनटीपीसी मुख्य गेट से लेकर इंदिरा चौक तक प्रतिदिन लगने वाला भीषण जाम अब आम नागरिकों और स्कूली बच्चों के लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बन चुका है। विडंबना यह है कि इस गंभीर समस्या पर न तो एनटीपीसी प्रबंधन कोई कदम उठा रहा है और न ही यातायात पुलिस की सक्रियता नजर आ रही है। जिम्मेदारों की इसी चुप्पी के बीच हर दिन हजारों लोग घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं।
Traffic jam : विशेष रूप से सुबह के समय जब स्कूलों के खुलने का वक्त होता है, तब स्थिति बेकाबू हो जाती है। अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले अभिभावकों, स्कूल बसों और वैन चालकों को इस मार्ग पर रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। जाम की स्थिति इतनी विकराल होती है कि कई बार बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्कूल गेट बंद हो जाने के कारण बच्चों को अक्सर आधे रास्ते से घर वापस लाना पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा का नुकसान हो रहा है।
Traffic jam : क्षेत्रीय वार्ड क्रमांक 38 के पार्षद ने इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि यह समस्या अब लाइलाज होती जा रही है। उन्होंने बताया कि रविवार को छोड़कर शेष सभी कार्यदिवसों में एक किलोमीटर से अधिक लंबी वाहनों की कतार लग जाती है। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि घटना स्थल से महज कुछ कदमों की दूरी पर विंध्यनगर थाना स्थित है, फिर भी वहां तैनात पुलिस बल इस अव्यवस्था को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। पार्षद ने मांग की है कि एनटीपीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन समन्वय बनाकर मार्ग पर नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित करें।
Traffic jam : जाम का सबसे बुरा असर स्कूल वैन और बस चालकों पर पड़ रहा है। चालकों का कहना है कि उन्हें एक ही शिफ्ट में कई स्कूलों के चक्कर लगाने होते हैं, लेकिन इंदिरा चौक के जाम में फंसने के कारण पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है। समय पर न पहुंचने के कारण उन्हें न केवल स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई झेलनी पड़ती है, बल्कि अभिभावकों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ता है। कई बार वैन चालकों को बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता कर तंग गलियों से निकलना पड़ता है।
बेहतर शिक्षा की उम्मीद में दूर-दराज से अपने बच्चों को एनटीपीसी परिसर स्थित स्कूलों में भेजने वाले अभिभावक अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उनका सवाल है कि जब समस्या जगजाहिर है, तो समाधान में देरी क्यों? स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से इस मार्ग को ‘नो पार्किंग’ जोन घोषित करने और पीक आवर्स में अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती करने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जनहित के मुद्दे पर कब जागता है।













