भोपाल : मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान के बाद उनकी प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ विभिन्न सामाजिक और कर्मचारी संगठनों से प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। इस प्रस्ताव में संतोष वर्मा के आचरण पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि बर्खास्तगी की मांग का भी उल्लेख किया गया है।
संगठनों के ज्ञापनों का हवाला देकर भेजा गया प्रस्ताव
राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में उन ज्ञापनों और शिकायत पत्रों का हवाला दिया गया है, जो अलग-अलग संगठनों ने संतोष वर्मा के खिलाफ सौंपे थे। इन ज्ञापनों में आरोप लगाया गया है कि उनके बयान प्रशासनिक गरिमा और सेवा नियमों के विपरीत हैं और इससे शासन की छवि को नुकसान पहुंचा है। सरकार का मानना है कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से संयमित और मर्यादित आचरण की अपेक्षा की जाती है।
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केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने यह पूरा मामला केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के समक्ष रखा है। प्रस्ताव के साथ संतोष वर्मा के अब तक के सेवा रिकॉर्ड, विवादित बयानों से जुड़े तथ्यों और संगठनों की मांगों का विस्तृत विवरण भी साझा किया गया है। अब केंद्र स्तर पर इस पर परीक्षण किया जाएगा कि सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई किस रूप में की जाए।
पदोन्नति से जुड़ी जानकारी भी केंद्र को भेजी गई
महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकार ने सिर्फ शिकायतों तक ही सीमित न रहते हुए संतोष वर्मा की पदोन्नति से संबंधित जानकारी भी केंद्र को भेजी है। माना जा रहा है कि यदि मामला गंभीर पाया गया, तो इसका असर उनकी भविष्य की पदोन्नति और करियर प्रगति पर भी पड़ सकता है। केंद्र सरकार इन तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लेगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तेज चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संगठनों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को सार्वजनिक मंचों पर बयान देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, जबकि कुछ इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का जरूरी उदाहरण मान रहे हैं।
केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय संतोष वर्मा के आचरण को सेवा नियमों का उल्लंघन मानता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, पदोन्नति पर रोक या अन्य सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, अंतिम निर्णय से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।













