digital arrest : जबलपुर: साइबर ठगों की एक बड़ी साजिश उस समय नाकाम हो गई, जब जबलपुर में एक दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके 70 लाख रुपये की ठगी करने की कोशिश कर रहे जालसाजों से खुद एडिशनल एसपी (ADSP) जितेंद्र सिंह आमने-सामने हो गए। पुलिस की तत्परता और एक वकील की सूझबूझ ने घमापुर थाना क्षेत्र के बाई का बगीचा इलाके के रहने वाले इस दंपति को एक बड़े वित्तीय नुकसान से बचा लिया।
digital arrest : साइबर जालसाजों ने दंपति को तीन दिनों तक डराकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर उन्हें पुलवामा हमले के लिए फंडिंग करने के नाम पर फंसाया। उन्होंने पीड़ित दंपति के बैंक खाते से 70 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का हवाला दिया और मामले को रफा-दफा करने के लिए उनसे 70 लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। इस डर और दबाव के चलते दंपति सदमे में आ गए थे।
digital arrest : मामले में मोड़ तब आया, जब ठगों के दबाव में पत्नी पैसे ट्रांसफर करने के लिए बैंक जा रही थी। उसने अपने परिचित वकील अनिल मिश्रा से संपर्क किया और उन्हें पूरी बात बताई। वकील मिश्रा ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और बिना देर किए एडिशनल एसपी जितेंद्र सिंह को सूचना दी। ADSP ने सूचना मिलते ही इसे गंभीरता से लिया और किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए तुरंत पीड़ित के घर पहुंचे।
digital arrest : ADSP जितेंद्र सिंह ने पीड़ित के घर पहुंचकर उनसे संपर्क कर रहे साइबर ठगों से सीधे वीडियो कॉल पर बात की। पुलिस अधिकारी को सामने देखकर ठगों के होश उड़ गए। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत कॉल काट दिया और दंपति से अपना संपर्क तोड़ दिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और वकील की सजगता के चलते दंपति एक बड़ी ठगी का शिकार होने से बच गए।
digital arrest : फिलहाल, पुलिस इस हाई-प्रोफाइल साइबर गिरोह की तलाश में जुट गई है, जो खुद को सरकारी अधिकारी बताकर भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल या दबाव में न आएं और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समय पर पुलिस को सूचना देना कैसे बड़ी ठगी को रोक सकता है।











