रायपुर: धान खरीदी प्रक्रिया में लगातार उत्पन्न हो रही गड़बड़ियों और तकनीकी खामियों पर बस्तर जिला किसान कांग्रेस ने सरकार को चुनौती दी है। सोमवार को संगठन ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूछा कि एग्रो पोर्टल आधारित टोकन प्रणाली क्यों विफल हो रही है और किसानों को इस व्यवस्था में लगातार क्यों परेशान होना पड़ रहा है।
तकनीकी खामियों की जिम्मेदारी किसकी?
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप ने सवाल उठाया कि प्रदेश के किसानों के लिए बनाई गई डिजिटल प्रणाली बार-बार फेल क्यों हो रही है। उन्होंने कहा, “यदि सरकार ने पोर्टल की तकनीकी खामियों का समय रहते समाधान नहीं किया, तो यह साफ है कि किसानों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।”
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टोकन न मिलने पर किसान कैसे सुरक्षित हैं?
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जिन किसानों के पास सभी वैध दस्तावेज हैं, वे टोकन न मिलने की वजह से धान बिक्री से बाहर क्यों हो रहे हैं। महासमुंद जिले के किसान मनबोध के आत्महत्या प्रयास का जिक्र करते हुए संगठन ने कहा कि यह घटना सरकार की उदासीनता का नतीजा है।
सरकार की जवाबदेही पर जोर
किसान कांग्रेस ने मांग की कि सरकार मैन्युअल पंजीयन या वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत लागू करे। संगठन ने पूछा कि क्या सरकार सर्वर क्षमता बढ़ाने और किसानों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी।
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सवालों के बीच धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
किसान कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 20 दिसंबर तक ठोस कार्रवाई नहीं की, तो पूरे प्रदेश में सतत धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन ने सवाल किया कि क्या सरकार किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है और क्या वे अपने डिजिटल टोकन सिस्टम में सुधार करेंगे।
किसानों की आवाज़ और राजनीतिक दबाव
ज्ञापन सौंपने के मौके पर कई किसान नेता उपस्थित थे, जिनमें दयाराम कश्यप, बबलू कश्यप, संतोष सेठिया, पूरन सिंह कश्यप आदि शामिल थे। संगठन ने सवाल किया कि क्या धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसानों को परेशान करना स्वीकार्य है और सरकार कब तक ऐसे सिस्टम की खामियों को सुधारने में लगाई जाएगी।













