नई दिल्ली : लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा आयोजित हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताया और कहा कि यह अवसर केवल समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्र के ऋण को स्वीकार करने का क्षण है।
‘वंदे मातरम्’—आजादी की ज्वाला जगाने वाला मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ एक गीत नहीं था, बल्कि वह प्रेरणा थी जिसने लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को संघर्ष, त्याग और तपस्या के रास्ते पर चलने की शक्ति दी। उन्होंने कहा कि यह वह जयघोष था जिसे बोलने पर भी अंग्रेजों की जेल और फांसी का सामना करना पड़ता था।पीएम ने याद दिलाया कि बंगाल विभाजन के समय वंदे मातरम् अंग्रेजों के खिलाफ सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था। प्रभात फेरियों से लेकर बड़े जनआंदोलनों तक, इस मंत्र ने जनता के मन में आजादी की लौ जलाई।
50, 100 और 150 वर्ष—तीन अलग कालखंडों का संकेत
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे होने पर देश गुलामी की जंजीरों में था। 100 वर्ष पूरे होने पर भारत आपातकाल के बोझ तले दबा हुआ था और लोकतंत्र का गला घोंटा गया था। इसके 150 वर्ष का यह अवसर वंदे मातरम् की गरिमा को पुनः स्थापित करने का समय है।
कांग्रेस और मुस्लिम लीग पर पीएम का तीखा हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछली सदी में वंदे मातरम् के साथ बड़ा विश्वासघात हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में जब मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् का विरोध किया, तो कांग्रेस ने घुटने टेक दिए और इसके मूल रूप को तोड़कर समझौता कर लिया।उन्होंने कहा कि नेहरू ने नेशनल सॉन्ग पर हुए विरोध का समर्थक रुख अपनाया, जबकि वंदे मातरम् वह गीत था जिसने अंग्रेजों को कांपने पर मजबूर कर दिया था।
बंकिम चंद्र चटोपाध्याय का योगदान याद
पीएम मोदी ने बताया कि 1875 में जब अंग्रेज 1857 के विद्रोह के बाद हिंदुस्तान पर दमन बढ़ा रहे थे, तभी बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने वंदे मातरम् को जन्म दिया। यह गीत अंग्रेजी शासन को चुनौती देने और राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए लिखा गया था।
उन्होंने बारिसाल आंदोलन, सरोजिनी बोस की प्रतिज्ञा और बच्चों पर हुए दमन का भी उल्लेख किया।
‘कोई पक्ष-विपक्ष नहीं—यह राष्ट्र ऋण का अवसर’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में इस विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का सम्मान करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि देश को इस ऐतिहासिक क्षण को आने नहीं देना चाहिए।











