नई दिल्ली : नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का संकट थमता नजर नहीं आ रहा है। पिछले 5 दिनों से जारी ऑपरेशनल फेलियर के कारण शनिवार को जहां 800 से अधिक फ्लाइटें रद्द रहीं, वहीं रविवार को भी 650 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल हो चुकी हैं। इससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इंडिगो का दावा—“95% रूट नॉर्मल”, लेकिन…
इंडिगो एयरलाइन ने रविवार सुबह बयान जारी कर कहा कि—“हमने 138 में से 135 डेस्टिनेशन पर फ्लाइट ऑपरेशन बहाल कर दिए हैं, यानी 95% रूट नॉर्मल हैं। हालांकि यात्रियों का भरोसा वापस जीतने में समय लगेगा।”
इंडिगो ने यह भी कहा कि 10 दिसंबर तक स्थिति पूरी तरह स्थिर होने की उम्मीद है।
परंतु वास्तविकता यह है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, जयपुर, भोपाल, हैदराबाद, त्रिची सहित कई प्रमुख शहरों से उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं।
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सरकार की सख्ती—कड़े आदेश जारी
तेजी से बिगड़ते हालात देखकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
सिविल एविएशन मंत्रालय और DGCA ने इंडिगो को स्पष्ट आदेश दिए हैं—
तेजी से बिगड़ते हालात देखकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
सिविल एविएशन मंत्रालय और DGCA ने इंडिगो को स्पष्ट आदेश दिए हैं—
1. 7 दिसंबर रात 8 बजे तक पूरा रिफंड प्रोसेस करें
कैंसिल या रुकी हुई सभी फ्लाइट्स का पैसा यात्रियों को लौटा देना होगा।
2. 48 घंटे में सभी मिसिंग बैगेज ट्रेस कर डिलीवर करना होगा
3. CEO को 24 घंटे में जवाब देना होगा
DGCA ने पूछा है—
“5 दिन से जारी संकट पर आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?”
जवाब न मिलने पर DGCA एकतरफा कार्रवाई कर सकता है।
4. बाकी एयरलाइंस को मनमानी किराया वसूली से रोका
सरकार ने किराया सीमा तय कर दी—
- 500 किमी तक: अधिकतम ₹7,500
- 500–1000 किमी: अधिकतम ₹12,000
- अधिकतम फ्लाइट किराया: ₹18,000
(बिजनेस क्लास पर लागू नहीं)
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संसद की कमेटी भी सख्त
लगातार बढ़ रही शिकायतों और यात्रियों के फंसने की घटनाओं ने अब संसद की ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म एंड कल्चर स्टैंडिंग कमेटी को भी सक्रिय कर दिया है।
JD(U) सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली समिति:
- प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों
- DGCA
- सिविल एविएशन मंत्रालय
को तलब कर सकती है।
कमेटी यह पूछेगी कि आखिर इतना बड़ा सर्विस ब्रेकडाउन क्यों हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए।













