Maternal and infant deaths : सतना। संजय गांधी अस्पताल के गायनिक विभाग में शुक्रवार दोपहर भारी हंगामा खड़ा हो गया। विभाग में बीते कई दिनों से चिकित्सकों के लगातार इस्तीफों के बीच मरीजों की बढ़ती समस्याएँ सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एक गर्भवती महिला के नवजात शिशु की मौत के बाद मामला तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि नवजात के साथ-साथ प्रसूता की भी मौत हो गई है, जिसके बाद वे पोस्ट-नेटल वार्ड में जोरदार हंगामा करने लगे।
घटना की शुरुआत तब हुई जब महिला के परिजन प्रसूता से मिलने की मांग करने लगे, लेकिन उन्हें वार्ड में प्रवेश नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें भटकाता रहा, जिससे उनका गुस्सा और बढ़ गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने पहले परिजनों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आई तो तत्काल अमहिया पुलिस को सूचना दी गई।
Maternal and infant deaths : सूचना मिलते ही अमहिया पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, परिजन इस बात पर अड़े रहे कि यदि प्रसूता जीवित है, तो उन्हें उससे मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। इसी बीच प्रसूता की एक महिला परिजन किसी तरह वार्ड तक पहुँच गई, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसका मोबाइल छीन लिया और कथित रूप से धक्का-मुक्की भी की। यह घटना सामने आते ही माहौल और बिगड़ गया।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि चिकित्सकों ने उन्हें एक्सचेंज के बदले भी रक्त उपलब्ध नहीं कराया। मजबूरन, उन्हें एक निजी ब्लड बैंक से ₹30,000 खर्च कर खून खरीदना पड़ा। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि कुछ दिनों पहले एक एनजीओ द्वारा 600 यूनिट से अधिक रक्त दान किया गया था, जिसके बाद संजय गांधी अस्पताल और जिला चिकित्सालय—दोनों के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त मौजूद था, फिर भी उन्हें राहत क्यों नहीं मिली?
Maternal and infant deaths : लगभग दो घंटे चले इस घमासान के बाद श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने वार्ड का निरीक्षण किया और प्रसूता की हालत की जानकारी ली। डीन अग्रवाल ने बताया कि प्रसूता जीवित है, हालांकि उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने परिजनों से शांति बनाए रखने और उपचार में सहयोग करने की अपील की।













