नई दिल्ली: एक बड़ी खबर के अनुसार, अमेरिका ने भारत को जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल बेचने की मंजूरी दे दी है। यह वही मिसाइलें हैं जिनका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में रूस के टैंकों को प्रभावी ढंग से नष्ट करने के लिए किया जा रहा है। डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने बुधवार को इस सौदे की पुष्टि की। डील की कुल कीमत लगभग 93 मिलियन डॉलर (करीब 780 करोड़ रुपये) है।
क्या है जैवलिन मिसाइल सिस्टम
जानकारी दें कि,जैवलिन FGM-148 मिसाइल दुनिया की सबसे एडवांस पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों में से एक है। इसे फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक पर डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि एक बार फायर करने के बाद सैनिक को लक्ष्य पर ध्यान नहीं रखना पड़ता, क्योंकि मिसाइल खुद लक्ष्य का पता लगाकर हमला करती है।
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इस मिसाइल को अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन और RTX कंपनी ने मिलकर विकसित किया है। यह मिसाइल टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के सबसे कमजोर हिस्से को निशाना बनाती है, जिससे बचना लगभग असंभव हो जाता है।
DSCA का बयान और सौदे की डिटेल्स
DSCA के मुताबिक इस पैकेज में शामिल हैं:
- 100 FGM-148 जैवलिन मिसाइलें
- 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट (LwCLU)
- 1 टेस्ट फ्लाई-टू-बाय मिसाइल
- ट्रेनिंग सिस्टम, सिमुलेशन राउंड और स्पेयर पार्ट्स
- 216 एक्सकैलिबर GPS-गाइडेड आर्टिलरी राउंड
इसके साथ ही DSCA का कहना है कि यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और सटीक मारक क्षमता
आपको यह भी बता दें कि M982A1 एक्सकैलिबर तोपखाना गोला GPS-गाइडेड है और सटीकता बहुत ज्यादा है। इससे नागरिक क्षेत्रों में गैर-सैन्य नुकसान कम होता है और पहला वार ही प्रभावी साबित होता है।
इस तरह से देखा जाए तो यह डील भारत की एंटी-टैंक और एंटी-आर्मर क्षमता को मजबूत करेगी। जैवलिन मिसाइलें और एक्सकैलिबर गोले भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में सटीक और प्रभावी मारक क्षमता प्रदान करेंगे।











