Karwa Chauth 2025 : करवा चौथ का पवित्र पर्व आज है, जब सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस कठिन व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा का विधान है। पंचांग के अनुसार, आज चतुर्थी तिथि रात बजकर मिनट तक है, और चंद्रोदय का समय रात बजकर मिनट पर है।
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Karwa Chauth 2025 : कई महिलाओं को सुबह से लेकर रात तक के सही विधि-विधान की जानकारी नहीं होती है। यहाँ जानिए सरगी खाने से लेकर व्रत पारण तक सुहागिनों को क्या-क्या करना चाहिए:
व्रत की सफलता के लिए सुबह से शाम तक आवश्यक कार्य
सुबह नित्य क्रिया और स्नान करने के बाद, सुहागिनों को इन नियमों का पालन करना चाहिए:
- सरगी ग्रहण: सूर्योदय से पहले उठकर सास द्वारा दी गई सरगी (पौष्टिक आहार) जरूर खाएँ। यह व्रत का शुभ आरंभ और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
- शुभ वस्त्र धारण: स्नान के बाद लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें, क्योंकि ये सौभाग्य और शुभता के प्रतीक हैं।
- व्रत का संकल्प: पूजा स्थल पर भगवान शिव-पार्वती और चंद्रदेव के सामने निर्जला व्रत का विधिवत संकल्प लें।
- पूजा स्थल की स्वच्छता: पूजा स्थल को स्वच्छ और सुंदर बनाएँ, इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
- करवा तैयार करना: मिट्टी या तांबे के करवे (बर्तन) में जल भरकर, उसमें चावल, रोली, चूड़ी और मिठाई रखें।
- सोलह श्रृंगार: व्रत के दिन सोलह श्रृंगार जरूर करें। यह सुहाग और वैवाहिक सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।
- माता पार्वती का पूजन: शाम के शुभ मुहूर्त में माता पार्वती की मूर्ति/तस्वीर की विधि-विधान से पूजा करें, उन्हें चौथ माता के रूप में पूजें।
- व्रत कथा: करवा चौथ की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। कथा सुने बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।
- अखंड दीपक: पूजा के समय घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं, जिसे सौभाग्य का दीपक कहा जाता है।
- शुभ मंत्रों का जाप: दिन भर व्रत के दौरान मन ही मन शुभ मंत्रों का जाप करते रहें, जैसे “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः”।
चंद्रोदय के बाद व्रत पारण की विधि
रात बजकर मिनट पर चंद्रमा के उदय होने के बाद ही व्रत खोला जाता है:
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- चंद्रमा को अर्घ्य: सबसे पहले छलनी में दीपक रखकर उसके माध्यम से चंद्रमा के दर्शन करें और फिर चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें।
- पति दर्शन: इसके बाद, उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें।
- आशीर्वाद: पति के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
- पारण: अंत में, पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई या प्रसाद खाकर निर्जला व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें।
करवा चौथ व्रत कथा का महत्व
करवा चौथ व्रत कथा एक साहूकार की बेटी की है, जिसने गलती से झूठे चाँद को देखकर अपना व्रत तोड़ दिया था, जिससे उसे अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला। बाद में, उसने अपनी भाभियों से सच्चाई जानने के बाद एक वर्ष तक पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया और करवा माता और गणेश जी के आशीर्वाद से अपने पति को पुनर्जीवन दिलाया। यह कथा व्रत के विधि-विधान और समर्पण के महत्व को दर्शाती है।











