रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई और सवाल दागा कि आखिर पुलिसकर्मी कहाँ और कैसे रह रहे हैं, जब सरकारी क्वार्टरों की भारी कमी है।

- हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 83,259 स्वीकृत पुलिस पदों में से अधिकांश जवानों और अफसरों को सरकारी आवास नहीं मिल रहा।
- चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि पूरे प्रदेश में सिर्फ 18,396 क्वार्टर उपलब्ध हैं। यानी करीब 78% पुलिसकर्मी या तो किराए पर रहने को मजबूर हैं या फिर जर्जर मकानों में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
•अदालत ने राज्य सरकार से पूछा – “जब सरकार पुलिस बल पर करोड़ों खर्च करती है, तो उनके रहने की मूलभूत सुविधा क्यों नहीं दे पा रही?”
•यह भी कहा गया कि बिना सम्मानजनक रहने की सुविधा दिए पुलिसकर्मियों से 24 घंटे सुरक्षा की उम्मीद करना सरकार की नाकामी है।
सरकार पर सीधा सवाल
•क्या सरकार सिर्फ़ घोषणाओं तक सीमित है?
•क्या पुलिस बल को वोट बैंक मानकर इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन उनकी बुनियादी ज़रूरतें तक पूरी नहीं की जा रहीं?
Nishaanebaz की राय
यह मामला केवल पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की रीढ़ का है। अगर जवान ही किराए और टूटी-फूटी झोपड़ियों में रहेंगे, तो वे जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे? हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सरकार के लिए सीधी चेतावनी है — अब बहानों से काम नहीं चलेगा, कार्रवाई करनी ही होगी।