रीवा। रीवा में सेंड्रीज घोटाले से भी दस गुना बड़ा घोटाला सामने आया है। करीब 200 करोड़ रुपए की भू-अर्जन राशि को किसानों तक पहुँचाने की बजाय अफसरों ने निजी बैंकों में डमी खाते खुलवाकर सालों तक घुमाया और ब्याज खाते रहे।
इस घोटाले में पूर्व कलेक्टर, एसडीएम, भू-अर्जन अधिकारी और बाबुओं की मिलीभगत सामने आई है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के नाम पर निजी बैंकों में लगभग 200 खाते खोले गए थे। इन्हीं खातों में करोड़ों रुपए जमा कर ब्याज की रकम अफसर और कर्मचारी आपस में बाँटते रहे।
पूरा मामला तब खुला जब एसडीएम ऑफिस के बाबू बृजमोहन पटेल की दराज से भू-अर्जन की पासबुकें और डमी खातों के दस्तावेज बरामद हुए। पटेल ने फर्जी नोटशीट चलाकर सीज जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया था। इसके बाद से ही वह फरार है।
रीवा कलेक्टर की जांच में सामने आया कि आईडीबीआई और एचडीएफसी सहित कई निजी बैंकों में करोड़ों रुपए भू-अर्जन की राशि जमा थी, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। ब्याज की पूरी राशि अफसरों ने पहले ही हजम कर ली।
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अब पूरा मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंप दिया गया है। जांच में कई आईएएस और एसडीएम स्तर के अफसरों के फँसने की संभावना है।
“रीवा में भू-अर्जन राशि से जुड़े बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच की जा रही है। मामले की फाइल ईओडब्ल्यू को भेज दी गई है।”
— डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, प्रभारी कलेक्टर, रीवा











