Friday, August 28, 2026
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allahabad high court : ‘बेलगाम ताकत का इस्तेमाल नहीं कर सकती पुलिस’, हाईकोर्ट ने नागरिकों की स्वतंत्रता पर की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली/इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है और स्पष्ट किया है कि पुलिस नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता को कम करने के लिए बेलगाम और अनियंत्रित शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

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हिस्ट्रीशीट मामले में आदेश

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम के तहत आठ साल पहले दर्ज किए गए एक केस की हिस्ट्रीशीट बंद करने का निर्देश दिया। यह मामला मोहम्मद वजीर द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

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पुलिस पर रोक

अदालत ने कहा कि पुलिस को निगरानी रजिस्टर में केवल व्यक्तिगत पसंद या नापसंद के आधार पर मनमाने ढंग से नाम दर्ज करने का कोई अप्रतिबंधित अधिकार नहीं है। निगरानी रजिस्टर में केवल उन्हीं लोगों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं जिनका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड हो या जिनके बारे में उचित रूप से माना जा सके कि वे आदतन अपराधी हैं।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता मोहम्मद वजीर के वकील ने अदालत में बताया कि वजीर आदतन अपराधी नहीं है और उसके खिलाफ 2016 में केवल एक मामला दर्ज किया गया था। आरोप पत्र दाखिल हो चुका है और वजीर ज़मानत पर बाहर है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने बिना ठोस या विश्वसनीय सामग्री के अवैध रूप से हिस्ट्रीशीट खोली, जो यूपी पुलिस विनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैराग्राफ 228 और 240 पुलिस को अनियंत्रित शक्ति नहीं देते और इसका उपयोग केवल नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता का हनन करने के लिए नहीं किया जा सकता।

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