नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। अमित शाह ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज सुदर्शन रेड्डी पर नक्सलवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडूम पर प्रतिबंध नहीं लगाया होता, तो 2020 तक नक्सलवाद खत्म हो गया होता।
अमित शाह की इस टिप्पणी पर 18 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के समूह ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने एक पत्र लिखकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का सलवा जुडूम पर फैसला कहीं भी नक्सलवाद या उसकी विचारधारा का समर्थन नहीं करता। उन्होंने शाह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए और चुनावी प्रचार को गरिमा के साथ चलाना चाहिए।
पूर्व जजों ने कहा कि किसी उम्मीदवार की विचारधारा पर हमला करना उचित नहीं है और नाम पुकारने से बचना ही बुद्धिमानी होगी।
रेड्डी ने दी प्रतिक्रिया
इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि वह अमित शाह के साथ सीधे तौर पर बहस नहीं करना चाहते। रेड्डी ने कहा – “सलवा जुडूम का फैसला केवल मेरा नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ का सामूहिक निर्णय था। अगर अमित शाह ने फैसला पढ़ा होता तो शायद वह ऐसी टिप्पणी नहीं करते।”
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सलवा जुडूम छत्तीसगढ़ में 2005 में शुरू किया गया एक अर्धसैनिक आंदोलन था, जिसे स्थानीय युवाओं को हथियार देकर नक्सलियों के खिलाफ खड़ा किया गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस आंदोलन पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि आम नागरिकों को हथियार देकर सुरक्षा बलों की तरह इस्तेमाल करना संविधान के खिलाफ है। अमित शाह का बयान और उस पर आई प्रतिक्रिया ने उपराष्ट्रपति चुनाव को और गरम कर दिया है।









