नई दिल्ली: भारत में ‘एक देश, एक चुनाव’ (ONOE) के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक मंगलवार को संपन्न हुई। इसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने लगभग तीन घंटे तक समिति के सदस्यों से चर्चा की। बैठक के बाद JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक की संवैधानिक वैधता पर सभी सदस्यों में सहमति बन गई है। समिति का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं का अध्ययन करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नीति-निर्माण में रुकावटें कम होंगी, प्रशासनिक कामकाज बेहतर होगा और चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
Read More : ICC महिला विश्व कप 2025 : भारत की टीम में बड़े बदलाव, शेफाली को नहीं मिली जगह
JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बताया कि विशेषज्ञों ने ‘एक देश, एक चुनाव’ को देश के विकास और स्थायित्व के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश को तेजी से आगे बढ़ाना है तो यह कदम महत्वपूर्ण है। समिति विधेयक पर सुझावों के साथ विचार-विमर्श कर रही है और इन सुझावों के आधार पर इसे संसद में सिफारिश के लिए भेजा जाएगा।
‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करने के लिए संविधान में अनुच्छेद 82, 83, 172 और 327 में संशोधन प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश कानून में भी बदलाव की योजना है। लोकसभा ने समिति को रिपोर्ट देने के लिए शीतकालीन सत्र 2025 के पहले सप्ताह तक का समय दिया है। समिति में कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं, और ये विभिन्न दलों से आते हैं।
इस बैठक के साथ ही विदेश मामलों की संसदीय समिति की भी बैठक हुई। इसमें व्यापार, सुरक्षा, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और रक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। अगली बैठक में वाणिज्य मंत्रालय से FTA संबंधित जानकारी ली जाएगी।
Read More : मोदी सरकार ऑनलाइन मनी गेम्स पर कसा शिकंजा, संसद में पेश होगा सट्टेबाजी प्रतिबंध बिल
सारांश यह है कि JPC ने ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक की संवैधानिक वैधता पर पूर्व CJI के साथ सहमति बना ली है। अब समिति विधेयक पर सुधार और सुझावों के साथ संसद को सिफारिश करेगी।











