Petrol Price Hike 2026: चुनाव खत्म होते ही क्यों बढ़ने लगे पेट्रोल के दाम? जानिए असली वजह

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Petrol Price Hike 2026: पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 अब देश में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। दुनिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर हमेशा आम लोगों की जेब तक पहुंचता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 70-75 डॉलर से बढ़कर 115 से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। अब जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कुछ सस्ता हुआ है, उसी समय पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है कि लोग अब सवाल पूछ रहे हैं।

पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब दुनिया में तेल सबसे महंगा था तब भारत में कीमतें स्थिर क्यों रहीं।होर्मुज स्ट्रेट पर खतरे और युद्ध की आशंका के कारण दुनिया भर में तेल संकट का डर था। लेकिन भारत में पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई। अब चुनाव खत्म होने के बाद लगातार दाम बढ़ने से राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि अगर तेल कंपनियां तब नुकसान सह सकती थीं, तो अब अचानक कीमतें बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ गई।

अब राहत के बीच क्यों बढ़े रेट?
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 के बीच अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड गिरकर करीब 97 से 105 डॉलर प्रति बैरल तक आ चुका है। इसके बावजूद पिछले 10 दिनों में कई बार पेट्रोल और CNG की कीमतें बढ़ाई गई हैं।कई शहरों में पेट्रोल 102 से 110 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। विपक्ष भी आरोप लगा रहा है कि चुनाव के दौरान महंगाई को कंट्रोल में दिखाया गया और अब धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

पेट्रोल महंगा होने की असली वजह क्या है?
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए वैश्विक बाजार का असर यहां सीधा पड़ता है।

लेकिन पेट्रोल की अंतिम कीमत में कई और चीजें भी जुड़ी होती हैं:

  • रिफाइनिंग कॉस्ट
  • ट्रांसपोर्ट खर्च
  • ऑयल कंपनियों का मार्जिन
  • डीलर कमीशन
  • केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
  • राज्य सरकारों का VAT और सेस

यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत मिलने के बाद भी आम लोगों को तुरंत राहत नहीं मिलती।

पेट्रोल पर कितना टैक्स लगता है?
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 में टैक्स सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। केंद्र सरकार फिलहाल पेट्रोल पर करीब 19.90 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लेती है।इसके अलावा अलग-अलग राज्य अपनी तरफ से VAT और सेस लगाते हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में टैक्स ज्यादा होने के कारण पेट्रोल और महंगा हो जाता है।कई शहरों में एक लीटर पेट्रोल की कीमत में 35 से 48 रुपए तक सिर्फ टैक्स का हिस्सा होता है।
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सरकारें पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं करतीं?
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 के पीछे सरकारों की कमाई भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोलियम टैक्स से हर साल करीब 6 लाख करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है।कोरोना के बाद बढ़े सरकारी खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और मुफ्त योजनाओं के कारण सरकारें टैक्स कम करने से बचती हैं। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल को अब तक GST के दायरे में नहीं लाया गया है।

आम आदमी पर क्या असर पड़ रहा है?
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर सब्जी, राशन, दूध और ऑनलाइन डिलीवरी तक पर पड़ता है।भोपाल, जयपुर, मुंबई और इंदौर जैसे शहरों में ऑटो किराया और बस भाड़ा भी बढ़ने लगा है। यानी महंगा पेट्रोल अब हर घर के बजट को प्रभावित कर रहा है।

सवाल सिर्फ तेल का नहीं, टाइमिंग का भी
पेट्रोल प्राइस हाइक 2026 को लेकर सबसे बड़ा सवाल अब टाइमिंग पर उठ रहा है। जब कच्चा तेल 126 डॉलर तक पहुंच गया था तब दाम स्थिर रहे, लेकिन अब राहत मिलने के बावजूद कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?यही सवाल इस पूरे मुद्दे को आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक बना रहा है।

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