Saturday, August 15, 2026
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7473 किमी/घं. की रफ्तार, हवा से वार और दुश्मन का सफाया—भारत की नई प्रलय मिसाइल

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नई दिल्ली। भारत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने क्वासी-बैलिस्टिक हाइपरसोनिक प्रलय मिसाइल के एयर-लॉन्च्ड संस्करण पर काम शुरू कर दिया है। यानी अब इसे जमीन से नहीं, बल्कि लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जाएगा। यह मिसाइल 6.1 मैक यानी 7473 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। अगर यह तकनीक सफल होती है तो अमेरिका और रूस के बाद भारत दुनिया का तीसरा देश होगा जिसके पास यह क्षमता होगी।

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प्रलय मिसाइल क्या है

प्रलय मिसाइल डीआरडीओ द्वारा विकसित शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है, जो 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को नष्ट कर सकती है। वर्तमान में इसका वजन करीब 5 टन है और इसे ट्रक से लॉन्च किया जाता है। एडवांस गाइडेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

500 किमी दूर बैठे दुश्मन के खेमे को तबाह कर सकती है प्रलय, जानें खूबियांएयर लॉन्च वर्जन क्यों अहम है

मिसाइल का हवाई संस्करण भारत की रणनीतिक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।

  • इसे फाइटर जेट से कहीं भी तुरंत तैनात किया जा सकेगा।
  • दुश्मन के गहरे इलाकों तक सटीक हमला संभव होगा।
  • एयर लॉन्च के कारण दुश्मन को पहले से पता नहीं चल पाएगा और बचाव मुश्किल होगा।

तकनीकी चुनौतियां

  • मौजूदा प्रलय मिसाइल का वजन 5 टन है, जिसे 2 से 3 टन तक कम करना होगा।
  • डिजाइन और पंखों में बदलाव कर हवा में संतुलन और स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी।
  • हवा में सुरक्षित ज्वलन (मिड-एयर इग्निशन) की नई तकनीक विकसित करनी होगी।
  • भारी मिसाइल को फाइटर जेट से सुरक्षित अलग करने के लिए ड्रॉप-सेपरेशन सिस्टम तैयार करना होगा।

Pralay missile ready for battlefield deployment with ability to evade enemy  defence systemsकब तक होगा परीक्षण

डीआरडीओ का लक्ष्य है कि 2028-29 तक प्रलय मिसाइल के एयर-लॉन्च्ड संस्करण का उड़ान परीक्षण किया जाए। इसमें ड्रॉप-सेपरेशन, उड़ान पथ की सटीकता और हवा में प्रोपल्शन इग्निशन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा।

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क्यों खास है यह प्रोजेक्ट

  • अमेरिका और रूस के बाद भारत तीसरा देश होगा जिसके पास यह क्षमता होगी।
  • चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के खिलाफ भारत की सैन्य शक्ति और बढ़ेगी।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की रक्षा तकनीक को नई ऊंचाई मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अगर डीआरडीओ इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लेता है तो भारत की सैन्य ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी।

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