Mauganj News : मऊगंज। खटखरी गांव में एक किशोरी की आत्महत्या ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को भी उजागर कर दिया है। घर में मोबाइल को लेकर मामूली विवाद के बाद बच्ची ने फांसी लगा ली, लेकिन इसके बाद की घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि मऊगंज जिले में सुविधाएं नाम मात्र की ही हैं।
Mauganj News : परिजनों का दावा है कि जब वे बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तब तक उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। डॉक्टर की अनुपस्थिति ने एक जिंदगी को शायद बचने का आखिरी मौका भी नहीं दिया।
Mauganj News : और यहीं नहीं रुकी लापरवाही—पोस्टमार्टम 24 घंटे तक टलता रहा क्योंकि महिला डॉक्टर नहीं थी। आखिरकार रीवा से डॉक्टर को बुलाना पड़ा, तब जाकर प्रक्रिया पूरी हो सकी।
Mauganj News : सबसे शर्मनाक पहलू ये रहा कि शव वाहन तक नहीं मिला। परिजनों ने आरोप लगाया कि वाहन चालक ने डीजल के पैसे मांगे, मजबूरी में शव को लोडर में रखकर अंतिम यात्रा के लिए ले जाना पड़ा।
Mauganj News : सरकार ‘बेटी बचाओ’ के नारे लगाती है, लेकिन जब सिस्टम ही बेटी को बचाने में विफल हो जाए, तब नारे खोखले लगने लगते हैं। मऊगंज को भले ही नया जिला बना दिया गया हो, लेकिन बुनियादी ढांचे और मानवीय संवेदनाओं की स्थिति अब भी शून्य है।
Mauganj News : अब सवाल ये है—क्या कोई अधिकारी जिम्मेदारी लेगा? क्या किसी पर कार्रवाई होगी? या फिर ये मामला भी कुछ दिनों बाद सरकारी कागजों और अखबारों की फाइलों में दब जाएगा?













