मुंबई | Malegaon Blast Case Update : मुंबई की विशेष NIA अदालत ने 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में असफल रहा। लेकिन इस फैसले ने उन परिवारों के जख्म हरे कर दिए, जिन्होंने इस धमाके में अपनों को खोया था।
Malegaon Blast Case Update : श्याद अजहर सैयद निसार, लियाकत शेख और अन्य पीड़ित परिजनों ने फैसले पर गहरा असंतोष जताया। लियाकत शेख ने नम आंखों से बताया कि उनकी 10 साल की बेटी फरहीन वड़ा पाव लेने गई थी, लेकिन धमाके में उसकी जान चली गई। आज भी उनके पास अपनी बच्ची की एक तस्वीर है और दिल में ये सवाल— “अगर इन सातों ने ब्लास्ट नहीं किया, तो फिर मेरी बेटी की मौत का जिम्मेदार कौन है?”
पीड़ितों का गुस्सा और सवाल इसलिए भी जायज हैं क्योंकि NIA ने अदालत में आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। हेमंत करकरे के नेतृत्व में जिस जांच के आधार पर आरोप तय किए गए थे, वही सबूत अब अदालत की नजर में कमजोर पड़ गए।
Malegaon Blast Case Update
कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि धमाका हुआ था, लेकिन यह सिद्ध नहीं हो सका कि बम साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की बताई गई मोटरसाइकिल में रखा गया था। अदालत ने 323 गवाहों और 8 डिफेंस गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद ये निर्णय सुनाया। साथ ही राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।
लेकिन सवाल वही— मुआवजे से क्या न्याय पूरा हो जाएगा? वकील शाहिद नदीम ने कहा— “यह फैसला पीड़ितों के लिए इंसाफ नहीं, बल्कि एक न भूलने वाला जख्म है।”
पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या देश की सर्वोच्च अदालत उन्हें वह न्याय दिला पाएगी, जिसका इंतजार उन्हें पिछले 17 सालों से है।











