Bihar Elections : पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्षी नेताओं तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनमें सच में जनता का हित प्राथमिकता है, तो वे बिहार चुनाव का बहिष्कार करके दिखाएं। आजतक को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में चिराग ने विपक्षी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा और खुद को “नई राजनीति” का प्रतिनिधि बताया।
तेजस्वी और राहुल को खुली चुनौती
चिराग पासवान ने कहा:
“मैं तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को खुली चुनौती देता हूं — अगर हिम्मत है तो बिहार विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करके दिखाएं। लेकिन वे ऐसा कभी नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें सत्ता चाहिए, न कि सिद्धांत।”
उनका कहना था कि विपक्ष सिर्फ भाषणों में नैतिकता की बात करता है, लेकिन जब वास्तविक चुनावी चुनौती सामने आती है, तो पीछे हट जाता है।
“इस बार जनरल सीट से लड़ूंगा”
इंटरव्यू के दौरान चिराग ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस बार आरक्षित नहीं, बल्कि सामान्य (जनरल) सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे पूरे दमखम और आत्मविश्वास के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे।
प्रशांत किशोर से मेल की बात
एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब चिराग से प्रशांत किशोर को लेकर सवाल किया गया। चिराग ने उन्हें “अच्छा दोस्त” बताते हुए कहा:
“प्रशांत किशोर की जातिविहीन समाज और नई राजनीति की जो सोच है, वह मुझसे मेल खाती है। मैं भी यही चाहता हूं कि बिहार की राजनीति जाति के दायरे से बाहर निकले।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावी गठबंधन या रणनीतिक साझेदारी का फैसला वक्त आने पर किया जाएगा।
बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल
चिराग ने नीतीश सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा:
“मैं वर्षों से कहता आ रहा हूं कि बिहार में कानून का राज होना चाहिए, अपराधियों का नहीं। आज भी ज़मीनी सच्चाई यही है कि आम नागरिक असुरक्षित महसूस करता है।” उन्होंने हाल के अपराध मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर जमीनी बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
विपक्ष Vs LJP (रामविलास)
2025 के बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है, और चिराग पासवान के ये बयानों से साफ है कि वे खुद को जातिविहीन युवा नेतृत्व के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन को लगातार भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों से राजनीतिक हमले झेलने पड़ रहे हैं। चिराग के बयान को न केवल एक राजनीतिक तंज बल्कि एक रणनीतिक दबाव के तौर पर भी देखा जा रहा है — खासकर उस वक्त जब विपक्षी दलों में सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान है।











