MP NEWS : नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो आयोग को बिना ठोस कारण के उसे समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने एमपीपीएससी को फटकार लगाते हुए 6 सप्ताह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने और सभी योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करने का आदेश दिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की खंडपीठ ने शनिवार को सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जब MPPSC ने राज्य के शासकीय और अर्ध-शासकीय कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों (Assistant Professors) की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। परीक्षा भी आयोजित की गई, लेकिन इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू होने से पहले आयोग ने बिना कोई ठोस कारण बताए भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और पदों को ही निरस्त कर दिया। इस निर्णय से आक्रोशित होकर अमीन खान नामक अभ्यर्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका आरोप था कि आयोग ने जानबूझकर गलत तथ्य हाई कोर्ट में पेश किए और कहा कि ये पद “गलती से खाली” दिखा दिए गए थे, जबकि वास्तव में वे रिक्त नहीं थे।
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हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक
इस मामले में हाई कोर्ट ने पहले MPPSC के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को खारिज कर दिया और MPPSC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एक वैधानिक संस्था के रूप में आयोग को जिम्मेदार और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा: “एक बार जब चयन प्रक्रिया शुरू हो गई हो, तो बिना वैध और स्पष्ट कारण के पदों को समाप्त करना मनमाना और अवैधानिक है। आयोग को ऐसा करने का अधिकार नहीं है।” खंडपीठ ने यह भी कहा कि इस तरह की गलती से आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं और यह गंभीर लापरवाही का मामला है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:
- 6 सप्ताह में भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
- बिना ठोस कारण के भविष्य में कोई चयन प्रक्रिया रद्द न की जाए।
- सभी खाली पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
- आयोग की कार्यप्रणाली में संवेदनशीलता और पारदर्शिता लाने की जरूरत है।
क्यों है यह फैसला अहम…
यह निर्णय न केवल मध्य प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह देश भर के लोक सेवा आयोगों और चयन बोर्डों के लिए भी एक मिसाल है। यह स्पष्ट करता है कि सरकारी भर्तियों में संवैधानिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन अनिवार्य है। अब MPPSC को कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप 6 सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति करनी होगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से भर्ती प्रक्रिया में विलंब और अनियमितता का सामना कर रहे हैं।











