Gudi Forest Range : खंडवा, मध्यप्रदेश। गुड़ी वन परिक्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। बुधवार सुबह लगभग 9 बजे ताकालखेड़ा बीट (कक्ष क्रमांक 741) में गश्त कर रही फॉरेस्ट टीम पर अतिक्रमणकारियों ने अचानक हमला कर दिया। हमलावरों की पहचान रामपुरी रैयत और जूनापानी गांव के लोगों के रूप में हुई है, जिन्होंने टीम पर जमकर पथराव किया। हमले के दौरान “पेड़ मां के नाम” योजना के तहत रोपे गए बांस के पौधों को भी उखाड़कर फेंक दिया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वनकर्मियों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। फिलहाल, कुछ अधिकारी अभी भी जंगल में फंसे हुए हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम भेजी गई है।
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यह पहली बार नहीं गुड़ी वन क्षेत्र में फॉरेस्ट टीम पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। मई 2025 में भी आमाखुजरी इलाके में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर ग्रामीणों ने पत्थर और लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। उस दौरान वन विभाग द्वारा जब्त किया गया ट्रैक्टर ग्रामीणों ने जबरन छुड़ा लिया था। हमले में तीन वनकर्मी घायल हुए थे। इसी तरह पिछले महीने खंडवा में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान भी विरोध में अतिक्रमणकारियों ने गोफन से हमला किया था। पथराव में पुलिस की गाड़ियों के शीशे टूट गए थे और स्थिति को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े थे। उस मामले में 11 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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Gudi Forest Range वनकर्मी खतरे में, अतिक्रमणकारी बेखौफ
इस ताजा हमले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या जंगलों में अब कानून की नहीं, अराजकता की ताकतों की चल रही है। वन विभाग की कार्रवाई के जवाब में लगातार हमले यह दर्शाते हैं कि अतिक्रमणकारी अब सजा या कानूनी कार्रवाई से नहीं डरते। जंगल की ज़मीनों पर दो साल से लगातार अवैध खेती हो रही है, लेकिन जब भी विभाग कदम उठाता है, उसे हिंसक विरोध का सामना करना पड़ता है। फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी मांग कर रहे हैं कि अतिक्रमण हटाने वाली टीमों को स्थायी सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि वे भयमुक्त होकर सरकारी ज़मीन की रक्षा कर सकें। प्रशासन और सरकार की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।











