रीवा। Rewa Illegal Plotting: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त और नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। रीवा शहर और उसके आसपास के इलाकों में विंड ग्रुप (Wind Group) द्वारा की जा रही प्लॉटिंग को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब गोविंदगढ़ तहसील क्षेत्र के अमिलकी गांव से बड़ा मामला सामने आया है। अमिलकी गांव में विंड ग्रुप द्वारा बिना किसी वैधानिक प्रशासनिक अनुमति और नियमों की अवहेलना कर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग किए जाने की लिखित शिकायत ग्रामीणों ने सीधे कलेक्ट्रेट स्थित जनसुनवाई में रीवा कलेक्टर से की।
ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई इस गंभीर शिकायत को कलेक्टर ने अत्यंत गंभीरता से लिया और तत्काल गोविंदगढ़ तहसीलदार को पूरे मामले की स्थल जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए। कलेक्टर का निर्देश मिलते ही राजस्व विभाग की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित भूमि से जुड़े खसरा-खतौनी के दस्तावेजों, सीमांकन और प्लॉटिंग की वैधानिक स्थिति की गहनता से पड़ताल की। राजस्व अमले की प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ कि संबंधित कृषि भूमि का नियम अनुसार कमर्शियल या आवासीय डायवर्सन (व्यपवर्तन) कराए बिना ही धड़ल्ले से भूखंड काटे जा रहे थे और उनकी धड़ल्ले से बिक्री की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा था।
मामले की पूरी जांच पड़ताल संपन्न करने के पश्चात गोविंदगढ़ तहसीलदार ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) को प्रेषित कर दी है। इस प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अमिलकी स्थित संबंधित जमीन पर प्लॉटिंग विकसित करने और क्रय-विक्रय के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त नहीं की गई थीं। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से उक्त भूमि पर की गई प्लॉटिंग और अब तक बेचे गए भूखंडों की कानूनी मान्यता को लेकर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप मचा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम पर रीवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीके माला ने मीडिया के समक्ष आकर भू-माफियाओं और स्थानीय राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत पर तीखे प्रहार किए हैं। अधिवक्ता बीके माला ने आरोप लगाया कि रीवा शहर और इससे सटे ग्रामीण अंचलों में संगठित भू-माफिया बेहद कम कीमतों पर कृषि भूमि की खरीदारी करते हैं और बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) व राजस्व डायवर्सन की अनुमति के महंगे दामों पर छोटे-छोटे प्लॉट बनाकर आम जनता को बेच देते हैं। इससे जहां एक ओर सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान होता है, वहीं दूसरी तरफ अपनी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिक भविष्य में नामांतरण, कानूनी पेचीदगियों और मूलभूत नागरिक सुविधाओं के अभाव में बुरी तरह फंस जाते हैं।
अधिवक्ता ने स्थानीय राजस्व अमले (पटवारी और राजस्व निरीक्षकों) की भूमिका को भी पूरी तरह संदिग्ध बताते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मैदानी अमले की कथित साठगांठ के कारण ही ऐसे अवैध कॉलोनाइजरों की कारगुजारियों की जानकारी समय रहते वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे उनके हौसले लगातार बुलंद रहते हैं। फिलहाल अमिलकी गांव में बिना अनुमति प्लॉटिंग का यह प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों के टेबल पर पहुंच चुका है। अब यह देखना होगा कि रीवा जिला प्रशासन इस अवैध प्लॉटिंग पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ-साथ इसमें शामिल विंड ग्रुप और जिम्मेदार राजस्व कर्मियों की जवाबदेही तय करते हुए क्या दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाता है।