नई दिल्ली। Apple India Revenue Record: वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में जारी सुस्ती और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी विविध चुनौतियों के बीच प्रमुख टेक दिग्गज एपल ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए अब तक की सबसे बड़ी कमाई का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने अर्निंग्स कॉल के दौरान इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि सितंबर की तिमाही में भारत से होने वाली आय अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वैश्विक स्तर पर एपल का कुल राजस्व सितंबर तिमाही के दौरान लगभग 12 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ 114.5 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 10.80 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जो कि बीते वर्ष की इसी अवधि में 102.5 अरब डॉलर रहा था। इसके साथ ही पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने लगभग 45 लाख करोड़ रुपये यानी 478.8 अरब डॉलर का सर्वकालिक रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है, जिसने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
भारतीय बाजार में कंपनी की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुख्य चालक आईफोन की अभूतपूर्व मांग और बिक्री को माना जा रहा है। सितंबर में समाप्त हुई तिमाही के दौरान देश में पुराने मॉडल छोड़कर नए आईफोन में अपग्रेड करने वाले ग्राहकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई। बड़ी संख्या में भारतीय उपभोक्ताओं ने अपने पुराने स्मार्टफोन के बदले नए आईफोन मॉडल्स को अपनाया। आईफोन के अतिरिक्त एपल के कंप्यूटर सेगमेंट मैक तथा सर्विसेज बिजनेस ने भी देश में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी के वित्तीय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे प्रमुख उभरते बाजारों में मैक श्रेणी का प्रदर्शन अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है, वहीं सर्विसेज बिजनेस ने भी स्थानीय बाजार में अपना सबसे बेहतरीन वित्तीय प्रदर्शन दर्ज कराया है।![]()
आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि कुल वैश्विक कमाई में आधा हिस्सा अकेले आईफोन बिक्री से ही प्राप्त हुआ है। सितंबर तिमाही में आईफोन की वैश्विक बिक्री से एपल को 57.6 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ, जो कि कुल कमाई का लगभग 50.3 प्रतिशत है तथा पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय प्रदर्शन की सूची में 31.6 अरब डॉलर की रिकॉर्ड कमाई के साथ सर्विसेज बिजनेस दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी कुल राजस्व में हिस्सेदारी 27.6 प्रतिशत रही। इसके अलावा मैक कंप्यूटर सेगमेंट ने 24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10.8 अरब डॉलर का योगदान दिया। वहीं वियरेबल्स, होम उपकरण, एक्सेसरीज और आईपैड सेगमेंट ने भी कंपनी के समग्र वित्तीय ढांचे को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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भारत में महंगे आईफोन मॉडल्स की पहुंच आम उपभोक्ताओं तक आसान होने के पीछे सुलभ वित्तीय योजनाएं और आसान नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। इसके साथ ही पुरानी डिवाइसेज पर मिलने वाली बेहतर एक्सचेंज वैल्यू ने भी ग्राहकों को नए मॉडल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है। देश के भीतर स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का विस्तार होने से उत्पादों की आपूर्ति और उपलब्धता में काफी सुधार आया है। छोटे और मध्यम शहरों में एपल के आधिकारिक स्टोर्स तथा प्राधिकृत रिसेलर्स के नेटवर्क का विस्तार होने से कंपनी को नए उपभोक्ता आधार से जुड़ने में सीधी मदद मिल रही है।
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इसी क्रम में कंपनी ने भारतीय डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी पैठ मजबूत करने के उद्देश्य से एक्सिस बैंक के साथ रणनीतिक साझेदारी करते हुए एपल पे सेवा का आधिकारिक शुभारंभ किया है। इस सुविधा के माध्यम से एक्सिस बैंक के वीजा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड धारक आईफोन, आईपैड और एपल वॉच के जरिए स्टोर, ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर संपर्क रहित सुरक्षित भुगतान कर सकेंगे। दुनिया भर के 90 से अधिक देशों में पहले से संचालित इस सेवा के भारत में आगमन से कंपनी के सर्विसेज बिजनेस को आने वाले समय में और अधिक विस्तार मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में एपल के सक्रिय डिवाइस का आंकड़ा 2.5 अरब के पार जा चुका है, जिसमें आईपैड और एपल वॉच के कुल खरीदारों में से आधे से ज्यादा पहली बार एपल इकोसिस्टम से जुड़ने वाले नए ग्राहक रहे हैं।
दूसरी ओर, रिकॉर्ड राजस्व और मजबूत मांग के बावजूद वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों तथा लागत दबावों के कारण एपल के शेयरों पर नकारात्मक असर देखा गया है। सितंबर तिमाही में ग्रॉस मार्जिन 47.9 प्रतिशत रहने के बाद आगामी दिसंबर तिमाही में इसके थोड़ा घटने के पूर्वानुमानों ने शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा किया। इन अनुमानों के सार्वजनिक होते ही ट्रेडिंग के दौरान कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के अतिरिक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिरी को आधुनिक बनाने और उसके विस्तार पर हो रहे भारी खर्च ने भी परिचालन मार्जिन पर दबाव बनाया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयरों में यह दबाव बना रहता है तो कंपनी के समग्र बाजार पूंजीकरण में अल्पावधि के भीतर कमी आ सकती है, हालांकि भारतीय बाजार में मिली अभूतपूर्व सफलता कंपनी के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान कर रही है।