Tuesday, September 8, 2026
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महाकाल की भस्म आरती में गूंजा उज्जैन, “हर-हर महादेव” से भक्तिमय हुआ वातावरण

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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक बार फिर भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त के पावन समय पर आयोजित भस्म आरती में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह लगभग 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

देश-विदेश से उमड़ी आस्था

इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। महाकाल के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर नजर आए और मंदिर परिसर में गहरी आस्था का माहौल देखने को मिला।

पंचामृत अभिषेक से शुरुआत

भस्म आरती से पूर्व भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत स्नान कराया गया। इस दौरान रुद्रपाठ, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

भस्म श्रृंगार का गूढ़ महत्व

अभिषेक के बाद भगवान का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया, जो इस आरती की सबसे खास परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की क्षणभंगुरता और वैराग्य का प्रतीक है, जो भक्तों को सांसारिक मोह से ऊपर उठकर ईश्वर की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है।

भक्ति और साधना का संगम

आरती के दौरान श्रद्धालु मंत्र-जप, भजन और ध्यान में लीन दिखाई दिए। पूरे मंदिर परिसर में एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया गया। मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

वैश्विक आस्था का केंद्र बना उज्जैन

महाकालेश्वर मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। भस्म आरती के माध्यम से उज्जैन आज विश्वभर में आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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