Farming: अगर आप कम समय में फल देने वाली फसल की तलाश में हैं, तो पपीते की खेती अच्छा विकल्प हो सकती है। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद सितंबर और अक्टूबर के दौरान तापमान में धीरे-धीरे बदलाव आता है, जो पपीते के पौधों की शुरुआती ग्रोथ के लिए अनुकूल माना जाता है।
ताइवान रेड लेडी किस्म से अच्छी पैदावार
पपीते की खेती में ताइवान रेड लेडी किस्म को किसानों के बीच काफी पसंद किया जाता है। उचित परिस्थितियों और अच्छी देखभाल में एक पौधे से करीब 50 किलो तक फल मिलने का दावा किया जाता है। एक एकड़ जमीन में लगभग 1200 से 1250 पौधे लगाए जा सकते हैं। इस हिसाब से उत्पादन की क्षमता काफी अच्छी हो सकती है। आमतौर पर रोपाई के करीब एक साल के भीतर पौधों पर अच्छा फल देखने को मिलने लगता है।
हालांकि, खेती से होने वाली वास्तविक कमाई उत्पादन, फल की गुणवत्ता, बाजार भाव, मौसम और खेती पर आने वाली लागत के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसलिए लाखों की आमदनी को निश्चित कमाई नहीं माना जाना चाहिए।
कैसी मिट्टी में लगाएं पपीता?
पपीते के पौधों के लिए ऐसी जमीन बेहतर रहती है, जिसमें पानी आसानी से निकल सके। बलुई दोमट या हल्की काली मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है। मिट्टी का पीएच करीब 6 से 7 के बीच होना उपयुक्त माना जाता है।
पौधों के बीच रखें पर्याप्त दूरी
पौधे के एक कतार से दूसरी कतार के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी जा सकती है। पर्याप्त अंतर होने से पौधों को फैलने की जगह मिलती है और खेत में हवा का आवागमन भी बेहतर रहता है।
सिंचाई में बरतें सावधानी
रोपाई के बाद जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें। इसके बाद पानी देने का अंतर मिट्टी में मौजूद नमी और मौसम को देखकर तय करना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में करीब 7 से 10 दिन के अंतर पर सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन बारिश या ज्यादा नमी होने पर पानी रोकना जरूरी है। पपीते की खेती में जलभराव नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए खेत में पानी निकासी की उचित व्यवस्था जरूर रखें।






