IPS Ratanlal Dangi: बिलासपुर। निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में नया अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि मामले की प्राथमिक जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। सरकार की ओर से आगे की विभागीय जांच की प्रक्रिया की जानकारी भी कोर्ट में रखी गई।
सरकार ने बताया कि पुलिस महानिदेशक की ओर से गृह विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें IPS दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी और IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने की बात कही गई है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की जानकारी दी गई है।
जांच की निष्पक्षता पर उठे थे सवाल
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई, उनकी भूमिका को लेकर पीड़िता ने आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने अगस्त में मांगा था जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 2 सितंबर को हुई सुनवाई में जवाब प्रस्तुत नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। सितंबर में कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जानकारी देने का निर्देश भी दिया था।
संपत्तियों की जांच की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से रतनलाल डांगी से जुड़ी कथित चल-अचल संपत्तियों की भी जांच की मांग की गई थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ के रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा और बिलासपुर के अलावा राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।
क्या है मामला?
यह मामला एक महिला योगा प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन योग सत्र के दौरान रतनलाल डांगी से उनका संपर्क हुआ था। बाद में उन्होंने कथित अश्लील संदेश और वीडियो कॉल के दौरान अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए। विरोध करने पर धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

IPS Ratanlal Dangi: महिला ने 15 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन DGP के सामने शिकायत दी थी। इसके बाद शिकायत की जांच के लिए IPS अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला ने बाद में केंद्र और राज्य के गृह विभाग के अधिकारियों के समक्ष शिकायत की और हाईकोर्ट का रुख किया। अगस्त 2026 में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए राज्य शासन और पुलिस मुख्यालय से जवाब मांगा था। अब हाईकोर्ट में सरकार की ओर से प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित होने की जानकारी दिए जाने के बाद मामले की आगे की विभागीय जांच पर सबकी नजर है।






