Rewa Jal Jeevan Mission Scam: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- रीवा में जल जीवन मिशन की एकल नल-जल योजना को लेकर जांच में करोड़ों रुपये के भुगतान पर गंभीर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना में करीब 136 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता सामने आई है। इसमें 130.47 करोड़ रुपये का भुगतान ऐसे कामों के लिए किए जाने का आरोप है, जिन्हें मौके पर पूरा हुआ नहीं पाया गया।आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW की जांच में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के 23 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, जांच शुरू होने के एक साल से अधिक समय बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामले की जांच के दौरान 12 गांवों में काम का भौतिक सत्यापन कराया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर ट्रेनी IAS सोनाली देव के नेतृत्व में भुगतान और काम से जुड़े दस्तावेजों की जांच के साथ मौके पर भी सत्यापन किया गया।इस दौरान कई जगह ऐसी स्थिति सामने आने का दावा किया गया, जहां जल जीवन मिशन के तहत टंकी या पाइपलाइन मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद घरों में नल लगे होने और काम पूरा होने की तस्वीरें रिकॉर्ड में होने की बात कही गई है।यहीं से योजना में हुए भुगतान की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जब मौके पर जरूरी काम मौजूद नहीं था तो परियोजना को पूरा दिखाकर भुगतान किस आधार पर किया गया।
थर्ड पार्टी भुगतान के दस्तावेज भी सवालों में
जांच में सिर्फ पाइपलाइन और पानी की टंकियों से जुड़े काम ही सवालों के घेरे में नहीं आए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक थर्ड पार्टी को किए गए कुछ भुगतानों के जरूरी दस्तावेज भी जांच के दौरान उपलब्ध नहीं मिले।इसके अलावा स्टेशनरी, कार्यालय खर्च और वाहन किराए जैसे मदों में भी एक करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान का उल्लेख सामने आया है। इन भुगतानों से जुड़े दस्तावेज नहीं मिलने की बात जांच में कही गई है।
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23 PHE कर्मचारियों की भूमिका पर जांच
EOW की जांच में PHE के 23 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी कथित अनियमितताओं की पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रही है।जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि जिन परियोजनाओं के काम मौके पर अधूरे या अनुपस्थित बताए गए, उनके लिए भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि दस्तावेजों की जांच और काम के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
खटखरी में पानी की टंकी गिरने से भी मामला गरमाया
जल जीवन मिशन से जुड़ी जांच के बीच मऊगंज के खटखरी में पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान गिरने का मामला भी सामने आया। इस घटना में लापरवाही के आरोप में EOW ने ठेकेदार समेत तीन इंजीनियरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।इस प्रकरण की भी जांच शुरू की गई है। टंकी निर्माण की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
एक साल से ज्यादा समय से जांच, कार्रवाई का इंतजार
जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भुगतान और काम की जांच लंबे समय से चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच को एक साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित अनियमितताओं की शुरुआत कहां से हुई और भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर नियमों का पालन नहीं हुआ। दस्तावेजों, मौके के सत्यापन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।फिलहाल 136 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता और 130.47 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े दावों की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।






