Saturday, August 22, 2026
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Mandsaur News :मानवता की मिसाल: 5 महीने बाद परिवार से मिली सुजाता, अनामिका फाउंडेशन ने दिलाई घर वापसी

Mandsaur News
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Mandsaur News :मंदसौर : कहते हैं की जब कोई अपना घर से अचानक बिछड़ जाता है तो परिवार उसके आने की एक उम्मीद के सहारे या तो सालों गुज़ार लेता या फिर पुरा जीवन लेकिन जब खोया अपने घर लौटता है जो वह खुशी जीवन कि सबसे बड़ी ख़ुशी होती है, ऐसी ही खुशी बंगाल की रहने वाली ‘सुजाता’ को एमपी के मंदसौर में मिली। करीब 5 माह बाद बंगाल की रहने वाली सुजाता जब अनामिका जनकल्याण फाउंडेशन मंदसोर की मदद से अपनी बेटी और दामाद से मिली तो खुशी के आंसू नहीं रोक पाईं।

 

Mandsaur News :पुनर्वास की यह कहानी है सुजाता की जो करीब एक महीने से मंदसौर की अनामिका जनकल्याण सेवा समिति के आश्रृयगृह कौशल्या धाम में रह रही थीं। कुछ हद तक विक्षिप्त सुजाता की घर से दुर जाने की कहानी भी बड़ी पीड़ादायक है। कोलकाता के एक स्टेशन से एक गुजराती परिवार ने खाने में कुछ नशा खिलाकर उसे अपने घर ले गए और घर का काम करवाया।

 

Mandsaur News :काम के एवज में सुजाता को बस खानो को रोटी मिलती थी। जब सुजाता को काम के साथ प्रताड़ना भी मिलने लगी तो वह माता मंदिर में पुजा का बहाना बनाकर वहां से भाग आई और फिर मंदसोर के सितामऊ क्षेत्र में पहुंची। यहां सुचना के बाद सितामऊ थाना पुलिस ने गत 2 जुन को समाजसेवी अनामिका जेन को सौपा। अनामिका व उनकी टीम ने गुगल की मदद से बंगाली सिखी और लगातार काउंसलिंग कर सुजाता के घर का पता लगाया।

Mandsaur News :सुजाता को याद आए मोबाइल नंबर से सुजाता के दामाद व बेटी से संपर्क किया तो उन्होंने कंफर्म किया की हां करीब 5 महिने पहले सुजाता घर से निकली थी तो फिर नहीं लोटी। सुजाता के दामाद ने यह भी बताया की सुजाता के पति दिल के मरीज हैं और उनकी बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है। उनकी दो बेटियाँ हैं, जिनमें से एक की शादी उनसे हुई है।

Mandsaur News :आज बुधवार को सुजाता के दामाद और उनकी छोटी बेटी उन्हें लेने मंदसौर पहुंचे। अनामिका जनकल्याण सेवा समिति ने सभी कागजी कार्रवाई और परिवार की पहचान सुनिश्चित करने के बाद सुजाता को उनके परिजनों को सौंप दिया। जब सुजाता अपनी छोटी बेटी और दामाद से मिली तो खुशी के आंसू रोक नहीं पाई‌। बता दें की समाजसेविका अनामिका प्रदीप जेन मंदसोर में कई सालों से जनसहयोग से विक्षिप्त महिला आश्रयग्रह का संचालन कर रही है। अनामिका अब तक 42 लावारिस, विक्षिप्त महिलाओं को उनसे परिवारों से मिला चुकी है और सुजाता के पुनर्वास से यह संख्या बढ़कर अब 43 हो गई है।

Mandsaur News :निश्चित ही यह कहानी मानव तस्करी और महिला क्रूरता के मामलों को उजागर करता है। मंदसोर की अनामिका जनकल्याण सेवा समिति और सीतामऊ पुलिस के त्वरित और मानवीय कार्य की बदौलत सुजाता को न्याय मिल पाया। उम्मीद है सुजाता अपने परिवार के साथ एक बार फिर जिंदगी का नया सफर शुरु करेंगी।

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