Wednesday, September 23, 2026
Home Chhattisgarh National Film Awards: छत्तीसगढ़ की ‘Ram-Nami’ ने रचा इतिहास, मिला सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री...

National Film Awards: छत्तीसगढ़ की ‘Ram-Nami’ ने रचा इतिहास, मिला सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार

Ram-Nami Documentary: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहचान दिलाने वाली डॉक्यूमेंट्री ‘Ram-Nami’ ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रामनामी समुदाय की धार्मिक आस्था, परंपराओं और जीवनशैली पर आधारित इस डॉक्यूमेंट्री को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।फिल्म के निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता भरतलाल गणपत को यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किया। 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में देशभर के फिल्मकारों और कलाकारों को सम्मानित किया गया।

पहली बार दिल्ली से बाहर हुआ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह अपने आयोजन स्थल को लेकर भी खास रहा। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित किया गया।गुजरात के एकता नगर में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। इसी समारोह में भरतलाल गणपत ने ‘Ram-Nami’ के लिए सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार हासिल किया।

रामनामी समुदाय की अनोखी परंपरा बनी फिल्म का आधार
‘Ram-Nami’ डॉक्यूमेंट्री छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित है। यह समुदाय अपने शरीर पर राम नाम का गोदना गुदवाने और अपने जीवन में राम नाम को विशेष महत्व देने की परंपरा के लिए जाना जाता है।फिल्म में समुदाय की आस्था, परंपराओं, सामाजिक जीवन और जीवनशैली को करीब से दिखाने की कोशिश की गई है। डॉक्यूमेंट्री के जरिए रामनामी समुदाय की उस मान्यता को भी सामने लाया गया है, जिसमें शरीर पर राम नाम अंकित कराने को धार्मिक आस्था से जोड़ा जाता है।
Read More: CGPSC Paper Leak Case: टामन सोनवानी समेत 3 के खिलाफ ED की चार्जशीट, 3700 पेज के दस्तावेज

कैलाश खेर की आवाज ने भी जोड़ा खास रंग
डॉक्यूमेंट्री में गायक और गीतकार कैलाश खेर की आवाज का भी इस्तेमाल किया गया है। इससे फिल्म की प्रस्तुति में संगीत और भावनात्मक पक्ष को मजबूती मिलने की बात सामने आई है।फिल्म का उद्देश्य केवल एक धार्मिक परंपरा को दिखाना नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शकों तक पहुंचाना भी है।

‘पुरस्कार के लिए नहीं बनाई थी फिल्म’
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद भरतलाल गणपत ने इसे भावुक कर देने वाला क्षण बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म बनाने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य पुरस्कार हासिल करना नहीं था।उनके अनुसार, वह रामनामी समुदाय की परंपराओं और उनकी कहानी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहते थे। फिल्म निर्माण के दौरान समुदाय के लोगों ने टीम के साथ सहयोग किया और अपनी परंपराओं, संघर्षों तथा जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए।इन्हीं अनुभवों के आधार पर डॉक्यूमेंट्री को समुदाय के वास्तविक जीवन के करीब रखने की कोशिश की गई।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिला मंच
भरतलाल गणपत ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बताते हुए रामनामी समुदाय की परंपरा को पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा बताया।‘Ram-Nami’ के जरिए इस समुदाय की परंपरा को राष्ट्रीय स्तर के मंच पर प्रस्तुत करने का मौका मिला। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने से डॉक्यूमेंट्री के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा की ओर भी लोगों का ध्यान गया है।

राम नाम को जीवन का हिस्सा मानने की परंपरा
फिल्म में रामनामी समुदाय की उस सोच और परंपरा को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिसमें राम नाम को केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि उसे जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।शरीर पर राम नाम अंकित कराने की परंपरा इस समुदाय की पहचान से जुड़ी हुई है। डॉक्यूमेंट्री में इसी आस्था के साथ समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी समझने की कोशिश की गई है।भरतलाल गणपत इससे पहले भी सिनेमा, टेलीविजन विज्ञापनों और डॉक्यूमेंट्री के क्षेत्र में काम कर चुके हैं। ‘Ram-Nami’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके काम के साथ छत्तीसगढ़ की इस सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here