Durg Cyber Fraud: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने खुद को कलेक्ट्रेट का तहसीलदार बताकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर अपने जाल में फंसा लिया। आरोपी ने पहले विभाग में अपनी पहचान और पद को लेकर भरोसा बनाया और फिर एक स्वास्थ्यकर्मी को नौकरी से निकालने की धमकी देकर उससे बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली।इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी के खाते से अलग-अलग लेनदेन के जरिए करीब 1 लाख 49 हजार रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने खुद को तहसीलदार बताते हुए स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ और बीपीएम से कर्मचारियों के मोबाइल नंबर हासिल किए। इसके बाद उसने विभागीय स्तर पर संपर्क बढ़ाया, जिससे कर्मचारियों को उसके पद और पहचान पर तत्काल शक नहीं हुआ।आरोपी ने कथित तौर पर विभागीय ग्रुप में एक फर्जी निर्देश भी प्रसारित करवाया। इस संदेश के जरिए उसने खुद को वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर पेश किया और विभाग में अपनी पकड़ होने का भरोसा पैदा किया।
स्वास्थ्यकर्मी को नौकरी से हटाने की धमकी
विभाग में भरोसा कायम करने के बाद आरोपी ने आरएचओ योगेश से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उसने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए योगेश को नौकरी से निकालने की धमकी दी।बताया जा रहा है कि धमकी और दबाव के कारण स्वास्थ्यकर्मी आरोपी की बातों में आ गया। इसके बाद ठग ने उससे बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली।
UPI और SBI YONO की जानकारी लेकर खाते से निकाले पैसे
आरोप है कि ठग ने बातचीत के दौरान योगेश से UPI और SBI YONO से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और पासवर्ड हासिल कर लिए।इसके बाद उसके बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन किए गए और करीब ₹1.49 लाख की रकम निकाल ली गई। रकम निकलने के बाद स्वास्थ्यकर्मी को अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला।इस तरह ठग ने पहले सरकारी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर भरोसा बनाया और फिर नौकरी जाने का डर दिखाकर बैंकिंग जानकारी हासिल करने का कथित तरीका अपनाया।
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पैसे निकलने के बाद पुलिस से की शिकायत
बैंक खाते से रकम निकलने का पता चलने के बाद स्वास्थ्यकर्मी ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।जांच के दौरान आरोपी की पहचान के साथ-साथ ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने विभागीय कर्मचारियों की जानकारी कैसे हासिल की और फर्जी निर्देश किस तरह विभागीय ग्रुप तक पहुंचाया।
सरकारी अधिकारी बनकर ठगी का नया तरीका
यह मामला साइबर ठगों के उस तरीके की ओर भी इशारा करता है, जिसमें वे किसी सरकारी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करके सामने वाले पर दबाव बनाते हैं।यहां भी आरोपी ने पहले वरिष्ठ अधिकारी के नाम और पद का भरोसा बनाया और फिर नौकरी जाने का डर दिखाकर स्वास्थ्यकर्मी को दबाव में लेने का आरोप है। इसके बाद बैंकिंग जानकारी लेकर खाते से रकम निकाले जाने की बात सामने आई है।
फोन पर अधिकारी बने तो पहले करें सत्यापन
साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम से फोन आने पर उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। नौकरी, विभागीय कार्रवाई या किसी अन्य डर के कारण जल्दबाजी में बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।OTP, पासवर्ड, UPI पिन और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अधिकारी के नाम पर संदिग्ध निर्देश मिलने पर संबंधित विभाग से सीधे संपर्क कर उसकी पुष्टि करना भी जरूरी है।







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