Global Oil Crisis: नई दिल्ली। दुनिया के ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़े संकट के संकेत दिखाई दे रहे हैं। तेल की सप्लाई के तीन प्रमुख समुद्री और वैकल्पिक रास्तों में रुकावट की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। जानकारों के मुताबिक, अगर सप्लाई में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है तो तेल आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब पर संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में पहले से ही तेल परिवहन प्रभावित है। दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल जरूरत से जुड़े इस मार्ग में किसी भी तरह की लंबी रुकावट वैश्विक सप्लाई के लिए बड़ा झटका मानी जाती है। वहीं, बाब-अल-मंदेब इलाके में हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण भी तेल और अन्य समुद्री माल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सऊदी अरब की पाइपलाइन पर ड्रोन हमला
इन दोनों मार्गों के बीच सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को लेकर भी चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब के इस प्रमुख वैकल्पिक तेल मार्ग को बंद करना पड़ा। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन अरब प्रायद्वीप के पार तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इसकी क्षमता करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन बताई गई है।
सऊदी के तेल भंडार को लेकर चिंता
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मौजूदा स्थिति के बीच सऊदी अरब के पास यानबू क्षेत्र में उपलब्ध तेल भंडार का सीमित बफर बचा है। कुछ अनुमानों में इसे करीब 5 से 7 दिनों के निर्यात के बराबर बताया गया है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से नुकसान और उपलब्ध भंडार को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
तेल उत्पादन में भी गिरावट
11 सितंबर को OPEC के सामने पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब के तेल उत्पादन में महीने-दर-महीने बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में अगस्त के दौरान सऊदी अरब का कच्चा तेल उत्पादन करीब 62.40 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का दावा किया गया है। बताया गया है कि यह 1990 के बाद का सबसे निचला स्तर है। तेल उत्पादन में कमी और सप्लाई रूट्स पर बढ़ते संकट ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
Global Oil Crisis: सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है। सोमवार को Brent Crude करीब 109 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं Murban Crude की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल बताई गई। नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
भारत समेत आयातक देशों पर असर
Global Oil Crisis: अगर तेल की सप्लाई में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमान का हवाला देते हुए रिपोर्ट में इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ी कमी की आशंका जताई गई है। ऐसे में तेल के प्रमुख रास्तों पर बनी रुकावट अगर और बढ़ती है, तो इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित न रहकर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।







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