Saturday, September 12, 2026
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Agriculture Teacher Recruitment: कृषि शिक्षक भर्ती की योग्यता पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से माँगा जवाब

Chhattisgarh High Court
Chhattisgarh High Court

बिलासपुर। Nishaanebaz.com-MP CG High Court Agriculture Teacher Recruitment 2026: छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा निकाली गई कृषि शिक्षक भर्ती परीक्षा में शैक्षणिक योग्यता के मापदंडों को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के अनिवार्य नियमों का स्पष्ट उल्लंघन किया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में उल्लेख किया गया है कि एनसीटीई (NCTE) द्वारा 2014 में जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के तहत 11वीं और 12वीं (उच्चतर माध्यमिक) कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए स्नातकोत्तर (Post Graduation) की उपाधि अनिवार्य योग्यता है। इसके विपरीत, राज्य शासन द्वारा जारी विज्ञापन में कृषि शिक्षकों के पदों के लिए केवल स्नातक (Graduation) की पात्रता ही रखी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि एनसीटीई की गाइडलाइन्स से इतर जाकर बनाई गई यह नियमावली पूरी तरह अनुचित है।

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विज्ञापित पदों के विवरण के अनुसार, राज्य में शिक्षक ई-संवर्ग के 868 और टी-संवर्ग के 786 यानी कुल 1,654 पदों पर सीधी भर्ती की जानी है। इनमें ई-संवर्ग के तहत रायपुर संभाग में 209, सरगुजा में 40, बिलासपुर में 270 और दुर्ग में 354 पद शामिल हैं। वहीं टी-संवर्ग के तहत सरगुजा में 265, बिलासपुर में 130, रायपुर में 56, दुर्ग में 50 और बस्तर संभाग में 285 पदों पर नियुक्ति होगी। इनमें कृषि विषय के ई-संवर्ग में 5 पद और टी-संवर्ग में 95 पद शामिल हैं।

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इस भर्ती प्रक्रिया की आवेदन शर्तों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सामान्य शिक्षकों के पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बीएड (B.Ed.) के साथ-साथ टीईटी (TET) परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है। लेकिन कृषि शिक्षकों के पद के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है और केवल बीएड उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य रखा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय का कहना है कि चूंकि कृषि शिक्षकों की पदस्थापना हायर सेकंडरी स्कूलों में होती है, इसलिए केवल बीएड अनिवार्य किया गया है। फिलहाल, हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य शासन के जवाब पर सभी अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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