What is BRICS: भारत समेत 11 देश क्यों जुड़े हैं BRICS से? जानिए इसका इतिहास और मकसद

Rahul Goshwami

What is BRICS: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS का नाम लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय समूह है, जो आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर भी साझा चर्चा का मंच देता है।BRICS का नाम शुरुआत में इसमें शामिल देशों के नाम के पहले अक्षरों से बनाया गया था। समय के साथ इस समूह का विस्तार हुआ और अब इसमें कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हो चुकी हैं।BRICS नाम पांच देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। इसमें B का मतलब ब्राजील, R का रूस, I का भारत, C का चीन और S का दक्षिण अफ्रीका है।दक्षिण अफ्रीका इस समूह में 2010 में शामिल हुआ था। इसके बाद BRICS का दायरा लगातार बढ़ता गया और नए सदस्य इसमें जुड़ते गए।

अब BRICS में कितने देश हैं?
विस्तार के बाद BRICS में अब 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात 2024 में विस्तार के दौरान समूह में शामिल हुए। इंडोनेशिया 2025 में BRICS का सदस्य बना।इसके अलावा कई देशों को साझेदार देश का दर्जा दिया गया है। इनमें मलेशिया, थाईलैंड और कजाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं।

BRICS की ताकत कितनी बड़ी है?
BRICS की खासियत केवल इसके सदस्य देशों की संख्या नहीं है। इस समूह में दुनिया की बड़ी आबादी वाले कई देश शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक BRICS से जुड़े देश दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।यही वजह है कि वैश्विक राजनीति और आर्थिक व्यवस्था में BRICS को एक प्रभावशाली मंच के तौर पर देखा जाता है।
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हर साल क्यों होता है BRICS Summit?
BRICS देशों के राष्ट्राध्यक्ष हर साल एक औपचारिक बैठक करते हैं। इसे BRICS Summit या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहा जाता है।इस बैठक में सदस्य देशों के नेता आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करते हैं। मेजबान देश के नेतृत्व में कई विषयों पर चर्चा होती है और भविष्य के लिए साझा दिशा तय करने की कोशिश की जाती है।

आर्थिक सहयोग बढ़ाना सबसे बड़ा लक्ष्य
BRICS Summit का एक प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना है। समूह के देश आपसी व्यापार और निवेश को आसान बनाने के तरीकों पर चर्चा करते हैं।BRICS देशों ने विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए New Development Bank भी बनाया है। इसका उद्देश्य सदस्य और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग देना है।

पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प पर भी चर्चा
BRICS को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ऐसे मंच के रूप में भी देखा जाता है, जहां वे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकें।विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में लंबे समय से पश्चिमी देशों का प्रभाव रहा है। BRICS के सदस्य वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।हालांकि, BRICS को केवल पश्चिमी देशों के विरोध के मंच के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसका फोकस आर्थिक सहयोग, विकास और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी रहता है।

किन वैश्विक मुद्दों पर होती है बात?
BRICS की बैठकों में केवल व्यापार और निवेश की चर्चा नहीं होती। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, तकनीकी बदलाव, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बनते हैं।दुनिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच सदस्य देश कई साझा चुनौतियों पर अपनी राय रखते हैं और सहयोग की संभावनाएं तलाशते हैं।

BRICS Summit नेताओं के लिए क्यों खास है?
BRICS शिखर सम्मेलन का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक ही मंच पर कई देशों के शीर्ष नेता मौजूद होते हैं। इससे नेताओं को औपचारिक बैठक के अलावा अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत का मौका भी मिलता है।कई बार इन मुलाकातों में व्यापार, निवेश, सुरक्षा और आपसी संबंधों से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत होती है। ऐसे में BRICS Summit सिर्फ समूह की बैठक नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है।

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