बस्ती (उत्तर प्रदेश)। Nishaanebaz.com-UP Basti Honeytrap Exposed: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पुलिस ने एक बेहद खौफनाक और संगठित हनीट्रैप व ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य पहले लोगों से सोशल मीडिया और कॉल्स के जरिए दोस्ती करते थे, फिर नजदीकियां बढ़ाकर उनकी बेहद निजी तस्वीरें और वीडियो बना लेते थे। इसके बाद ब्लैकमेलिंग और मोटी रकम की वसूली का खेल शुरू होता था।
इस हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप रैकेट की परतें तब खुलीं जब वाल्टरगंज थाने के प्रभारी (SHO) सूर्य प्रकाश सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की पुलिस जांच शुरू हुई। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 32 वर्षीय मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और सहयोगी अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों मिलकर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
Read More : Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढही; 7 की मौत, 5 अधिकारी निलंबित
दोस्ती से शुरू होकर ब्लैकमेलिंग तक पहुंचती थी साज़िश
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह में प्रियंका चौधरी की मुख्य भूमिका लोगों को अपने जाल में फंसाने की थी। वह टारगेट बनाए गए व्यक्ति से मीठी बातें कर धीरे-धीरे दोस्ती गहराती थी और बाद में उन्हें अपने झांसे में लेकर निजी पल और वीडियो रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद दूसरा चरण शुरू होता था, जिसमें आपत्तिजनक वीडियो और फोटो को सार्वजनिक करने या परिवार के पास भेजने की धमकी देकर लाखों रुपये की डिमांड की जाती थी।
Read More : Indore News: इंदौर की सड़क पर बेकाबू सरकारी स्कॉर्पियो! वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
पिता और वकील मिलकर करते थे अवैध वसूली
पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने में प्रियंका के पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव मुख्य रूप से शामिल थे। प्रियंका द्वारा शिकार को जाल में फंसाने और वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद उसका पिता और वकील कानूनी पचड़ों व सामाजिक बदनामी का डर दिखाकर सीधे रकम ऐंठने का काम करते थे। पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
थाना प्रभारी की आत्महत्या की जांच से खुला राज
उल्लेखनीय है कि 29 अगस्त को वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनके बेटे संदीप सिंह द्वारा 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पुलिस ने जब मृतक अधिकारी के मोबाइल और कॉल डिटेल्स (CDR) की जांच की, तो प्रियंका और वकील विजय प्रकाश यादव से लगातार बातचीत के प्रमाण मिले।
घटना के दिन 29 अगस्त की दोपहर 1:41 बजे अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव ने अधिकारी को आखिरी कॉल की थी। पुलिस को संदेह है कि इसी कॉल और ब्लैकमेलिंग के भारी मानसिक दबाव के चलते थाना प्रभारी ने यह घातक कदम उठाया। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार तीनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रही है।






