Friday, September 4, 2026
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MP News: टीकमगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स टेंडर पर सवाल, करोड़ों की गड़बड़ी के आरोप; कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

[nishaanebaz.com] MP News:जमील खान\टीकमगढ़। जिले के उप स्वास्थ्य केंद्रों में मल्टी स्किल्ड वर्करों की आउटसोर्स भर्ती से जुड़े टेंडर में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। टेंडर और अनुबंध की शर्तों में कथित छेड़छाड़ की शिकायत के बाद कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मूल दस्तावेजों में बदलाव कर अनुबंध की अवधि बढ़ाई गई, जिससे निजी कंपनी को करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की जांच शुरू करा दी है।

सितंबर 2025 में निकाला गया था टेंडर

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर 2025 में जिले के उप स्वास्थ्य केंद्रों में मल्टी स्किल्ड वर्करों की आउटसोर्स भर्ती के लिए 12 महीने की अवधि का टेंडर जारी किया था।इसके बाद फरवरी 2026 में इंदौर की स्काईबुल सिक्योरिटी सर्विस के साथ अनुबंध किया गया। हालांकि, विभाग ने कुछ समय बाद ही इस अनुबंध को रद्द कर दिया था।

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कंपनी ने विभाग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने विभाग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और मूल कार्यादेश को बहाल करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट के आदेश के पालन में दस्तावेज बदलने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप हाईकोर्ट के आदेश के पालन के दौरान मूल दस्तावेजों में कथित बदलाव को लेकर है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि क्रय शाखा प्रभारी नवीन शर्मा ने मूल दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर करते हुए एक साल के अनुबंध को बढ़ाकर दो साल कर दिया।

शिकायतकर्ता की ओर से आशंका जताई गई है कि अनुबंध की अवधि बढ़ने से निजी कंपनी को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

क्रय शाखा प्रभारी की दोबारा पदस्थापना पर भी सवाल

मामले में क्रय शाखा प्रभारी नवीन शर्मा की पुनः पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।प्रशासन की जांच में यह भी देखा जाएगा कि टेंडर की मूल शर्तें क्या थीं, अनुबंध में बदलाव किस स्तर पर हुआ और यदि दस्तावेजों में कोई परिवर्तन किया गया तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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कलेक्टर ने CMHO को सौंपी जांच

शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए CMHO को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। संबंधित टेंडर, अनुबंध और मूल दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।CMHO डॉ. अमित चौधरी ने कहा कि मामला गंभीर है और कलेक्टर के निर्देश पर दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल प्रशासनिक जांच में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अनुबंध की शर्तों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच में यदि दस्तावेजों में हेरफेर या वित्तीय अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि अनुबंध की अवधि में कथित बदलाव कैसे हुआ और इससे सरकारी धन पर कितना वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है।

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