[nishaanebaz.com] Indore Crime: इंदौर। साइबर ठगी के लिए बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह के खिलाफ इंदौर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। परदेशीपुरा थाना पुलिस और साइबर सेल ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के तहत कार्रवाई करते हुए बैंक खातों को आगे बेचने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में बैंक खाताधारक समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले का मुख्य आरोपी रूपेश उर्फ रॉनी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हैं।
2 हजार में दोस्त को बेचा बैंक अकाउंट
डीसीपी अमन राठौड़ के अनुसार, राज्य साइबर सेल भोपाल से मिली गोपनीय सूची के आधार पर साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे बैंक खातों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान आरोपियों के बीच बैंक खाते की खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ।
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पुलिस के मुताबिक, मोनिश उर्फ मोनू मंडलोई ने अपने दोस्त पीयूष उर्फ नयन कुशवाहा के कहने पर बैंक खाता खुलवाया था। इसके बाद उसने अपनी पासबुक, एटीएम और चेकबुक महज 2 हजार रुपये में पीयूष को दे दी।
एक हाथ से दूसरे हाथ बिकता रहा खाता
पुलिस जांच में सामने आया कि बैंक खाता मिलने के बाद पीयूष ने इसे आगे ऋषि उर्फ बिट्टू पवार को 5 हजार रुपये में बेच दिया। इसके बाद ऋषि ने कथित तौर पर यही खाता रूपेश उर्फ रॉनी को 10 हजार रुपये में सौंप दिया।इस तरह कुछ हजार रुपये के लालच में खोला गया बैंक खाता अलग-अलग लोगों के हाथों से होते हुए साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले खाते में बदल गया। पुलिस इसे म्यूल बैंक अकाउंट के तौर पर जांच रही है।
USDT से INR एक्सचेंज के नाम पर ठगी का आरोप
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी रूपेश उर्फ रॉनी ने इस बैंक खाते का इस्तेमाल USDT से INR एक्सचेंज के नाम पर ठगी के लिए किया। आरोप है कि उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के लोगों को क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी लेन-देन के नाम पर निशाना बनाया गया।ठगी के जरिए हासिल रकम इसी बैंक खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और बैंक खाते के जरिए कितनी रकम का लेन-देन किया गया।
चार आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
पुलिस ने मामले में मोनिश मंडलोई, पीयूष कुशवाहा, ऋषि पवार और सुजल सोनी को गिरफ्तार किया है। वहीं मुख्य आरोपी रूपेश मंगरोलिया फरार बताया जा रहा है।पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। साथ ही सुजल सोनी की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी।
साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराना भी गंभीर मामला
पुलिस की जांच में यह मामला केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक खातों की खरीद-फरोख्त के नेटवर्क की ओर भी इशारा करता है। ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग जानकारी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। खाते का दुरुपयोग होने पर खाताधारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
एक महीने चलेगा ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’
डीसीपी अमन राठौड़ के मुताबिक, साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के तहत अभियान एक महीने तक लगातार जारी रहेगा। इस दौरान साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली सिम, बैंक खातों और अन्य माध्यमों की जांच की जाएगी।
पुलिस ऐसे बैंक खाताधारकों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी, जो लालच या किसी अन्य वजह से अपने खाते को साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते हैं। इंदौर पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।






