[nishaanebaz.com] Morena Fake Job Cards: मुरैना। जिले की ग्राम पंचायत इमलिया में मनरेगा के जॉबकार्ड और मस्टर रोल को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ ऐसे जॉबकार्डों में मृत मुखिया की मृत्यु के बाद नए लोगों के नाम सदस्य के रूप में जोड़ दिए गए, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे न तो संबंधित परिवार के सदस्य हैं और न ही गांव के निवासी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में गांव या परिवार में मौजूद नहीं हैं, तो उनके नाम से मनरेगा में काम की मांग किसने की और मस्टर रोल में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हुई।
मामले को लेकर जिला पंचायत की जांच रिपोर्ट पर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम ने कथित तौर पर मौके पर भौतिक सत्यापन करने के बजाय मुख्य रूप से दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलेश कुमार भार्गव ने मामले में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ जॉबकार्डों में मृत मुखियाओं की मृत्यु के बाद नए सदस्यों के नाम जोड़े जाने और उनके नाम से मनरेगा में कार्य उपलब्ध कराए जाने की बात कही है।
मृत सदस्य के जॉबकार्ड में नए नाम जोड़ने पर सवाल
जानकारी के अनुसार, जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/41 में दर्ज दिलीप की मृत्यु 12 अक्टूबर 2010 को हो चुकी थी। इसके बाद इसी जॉबकार्ड में वीरू नामक व्यक्ति को सदस्य के रूप में जोड़ा गया।ग्रामीणों का दावा है कि वीरू संबंधित परिवार और गांव में मौजूद नहीं है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि उसके नाम से मनरेगा में काम की मांग किसने की, उसकी उपस्थिति मस्टर रोल में कैसे दर्ज हुई और मजदूरी का भुगतान किस आधार पर किया गया।
महाराज सिंह की मृत्यु के बाद कमलेश और रामवीर के नाम जुड़े
इसी तरह जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/236 में दर्ज महाराज सिंह की मृत्यु 23 जनवरी 2023 को हो चुकी थी। इसके बाद जॉबकार्ड में कमलेश और रामवीर के नाम सदस्य के रूप में शामिल किए गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि ये दोनों व्यक्ति भी संबंधित परिवार और गांव के निवासी नहीं हैं। ऐसे में इनके नाम से मनरेगा में रोजगार की मांग दर्ज होने और मजदूरी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग उठ रही है।
दामोदर बघेल के जॉबकार्ड को लेकर भी उठे सवाल
जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/14 में दर्ज दामोदर बघेल की मृत्यु 23 जुलाई 2022 को हुई थी। इसके बाद विसन और शुभम के नाम सदस्य के रूप में जोड़े गए।ग्रामीणों का दावा है कि ये दोनों नाम भी संबंधित परिवार और गांव में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि जॉबकार्ड में नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई और क्या उनके दस्तावेजों तथा निवास की विधिवत जांच की गई थी।
मनरेगा में काम की मांग और मस्टर रोल की जांच की मांग
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के गांव और परिवार से जुड़े होने पर ही विवाद है, उनके नाम से मनरेगा में काम की मांग और उपस्थिति कैसे दर्ज हुई।ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल जॉबकार्ड रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं है। संबंधित व्यक्तियों के आधार कार्ड, समग्र आईडी, परिवार रजिस्टर, जॉबकार्ड में नाम जोड़ने के आवेदन, रोजगार की मांग, मस्टर रोल और बैंक खातों में हुए मजदूरी भुगतान की भी जांच की जानी चाहिए।
एक अन्य जॉबकार्ड को लेकर भी विवाद
जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/69 मुन्ना पुत्र ठकुरी के नाम से दर्ज है, जिसमें गुड्डी और लक्ष्मी सदस्य के रूप में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्मी जीवित हैं और उनके द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग किए जाने पर उन्हें काम उपलब्ध कराया गया।हालांकि ग्रामीणों का सवाल उन अन्य मामलों को लेकर है, जिनमें नए जोड़े गए लोगों की वास्तविक पहचान और संबंधित परिवार से उनके संबंध पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
‘कागजों में जांच या जमीन पर हकीकत?’
ग्रामीणों ने जिला पंचायत अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि जांच टीम ने संबंधित परिवारों, ग्रामीणों और कथित मजदूरों से मौके पर पूछताछ और भौतिक सत्यापन करने के बजाय दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी।ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में गांव में मौजूद नहीं हैं, तो इसकी पुष्टि मौके पर जाकर की जा सकती थी। इसके लिए परिवार रजिस्टर, आधार विवरण, समग्र आईडी और निवास से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान जरूरी बताया जा रहा है।
स्वतंत्र जांच और भुगतान खातों की पड़ताल की मांग
Morena Fake Job Cards: ग्रामीणों ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित जॉबकार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि मृत मुखियाओं के जॉबकार्ड में नए नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े गए।इसके साथ ही मस्टर रोल में दर्ज उपस्थिति, रोजगार की मांग और मजदूरी का भुगतान प्राप्त करने वाले बैंक खातों की भी जांच करने की मांग उठाई गई है।
ग्रामीणों ने सचिव और सरपंच की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल इमलिया ग्राम पंचायत में मनरेगा जॉबकार्ड और कथित मजदूरों को लेकर उठा विवाद स्थानीय प्रशासन की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।





