[Nishaanebaz News] MP News: शशांक सोनकपुरिया\बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से परिवहन व्यवस्था और वाहन चेकिंग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिले के ससुंदरा बैरियर क्षेत्र में ट्रक चालकों से कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि यहां वाहनों को रोककर कुछ लोग ड्राइवरों से बिना रसीद के 500 से 1000 रुपये तक की रकम वसूल रहे हैं। पैसे देने से इनकार करने पर ट्रक चालकों के साथ कथित तौर पर अभद्रता और दबाव बनाने की शिकायत भी सामने आई है।
इस पूरे मामले ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि जिस स्थान को बंद बैरियर बताया जा रहा है, वहां वाहन चेकिंग के नाम पर कथित वसूली की शिकायतों ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर सवाल पैदा किए हैं।
बंद पड़े बैरियर पर वाहनों की चेकिंग, लोगों की भूमिका पर सवाल
ससुंदरा क्षेत्र में आने-जाने वाले अंतरराज्यीय वाहनों की जांच के लिए एक चेकिंग पॉइंट बनाए जाने की बात सामने आई है। यहां वाहनों के दस्तावेज, ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन जैसी गतिविधियों की जांच का अधिकार संबंधित परिवहन अधिकारियों को होता है।
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लेकिन आरोप है कि मौके पर विभागीय अधिकारियों के बजाय अन्य लोग वाहन चालकों को रोककर कार्रवाई कर रहे हैं। ट्रक चालकों की शिकायत है कि कुछ लोगों द्वारा वर्दी या अधिकार का प्रभाव दिखाकर उनसे रकम मांगी जाती है।यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वाहन चालकों से कथित तौर पर वसूली करने वाले ये लोग कौन हैं, उन्हें किसके द्वारा यहां तैनात किया गया है और क्या उनका परिवहन विभाग या आरटीओ कार्यालय से कोई अधिकृत संबंध है।
500 से 1000 रुपये तक कथित वसूली की शिकायत
ट्रक चालकों के अनुसार, उनसे वाहन चेकिंग के दौरान 500 और 1000 रुपये तक की रकम मांगी जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह रकम बिना किसी रसीद के ली जाती है।आरोप यह भी है कि पैसे नहीं देने वाले वाहन चालकों पर दबाव बनाया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि किसी वाहन में दस्तावेजों की कमी, ओवरलोडिंग या अन्य नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार आधिकारिक चालानी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही और कथित तौर पर नकद वसूली की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं।
ग्वालियर RTO के नाम से ऑनलाइन चालान पर भी सवाल
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू ऑनलाइन चालान से जुड़ा है। शिकायत में दावा किया गया है कि बैतूल जिले में वाहनों को रोके जाने के बाद कुछ ट्रक चालकों को ग्वालियर आरटीओ के नाम से ऑनलाइन चालान भेजे गए।
इसी वजह से वाहन चालकों और शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि बैतूल क्षेत्र में हुई कथित कार्रवाई के बाद ग्वालियर आरटीओ के नाम से चालान किस आधार पर जारी किए गए। हालांकि, इस संबंध में संबंधित परिवहन विभाग या ग्वालियर आरटीओ की ओर से इस खबर के समय तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
निष्पक्ष जांच की मांग, जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट करने की जरूरत
पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। मांग की जा रही है कि ससुंदरा चेकिंग पॉइंट पर तैनात या सक्रिय लोगों की पहचान की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें वाहन जांच या कार्रवाई करने का अधिकार किस आधार पर दिया गया है।साथ ही कथित अवैध वसूली, बिना रसीद रकम लेने के आरोप और ऑनलाइन चालान की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन चालकों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और नियमों के तहत कार्रवाई किस स्तर पर की गई।
बैतूल RTO से संपर्क का प्रयास, नहीं मिल सका जवाब
मामले को लेकर बैतूल आरटीओ से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में संबंधित विभाग का पक्ष सामने नहीं आ पाया है।अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ससुंदरा क्षेत्र में वाहन चेकिंग के नाम पर सक्रिय लोग कौन हैं, क्या वे अधिकृत हैं, कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है और ग्वालियर आरटीओ के नाम से जारी ऑनलाइन चालान की प्रक्रिया क्या है।इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शिकायतों की जांच कर जिम्मेदारी तय करते हैं या नहीं।





