Tuesday, September 29, 2026
Home Madhya Pradesh Gwalior Gwalior Hospital Accident: KRH में मासूमों की जान पर आया खतरा! चिल्ड्रन...

Gwalior Hospital Accident: KRH में मासूमों की जान पर आया खतरा! चिल्ड्रन वार्ड की छत का प्लास्टर गिरा, 2 माह की बच्ची बाल-बाल बची

[Nishaanebaz News] Gwalior Hospital Accident: ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल कमलाराजा अस्पताल (KRH) में एक बार फिर जर्जर भवन की स्थिति ने मासूम मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 में छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। जिस समय यह हादसा हुआ, वार्ड में बच्चे भर्ती थे और प्लास्टर पलंग नंबर-19 पर गिरा।

हादसे में पलंग पर भर्ती करीब 2 माह की मासूम बच्ची बाल-बाल बच गई। प्लास्टर के कुछ हल्के टुकड़े बच्ची को लगे, जिसके बाद वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि बच्ची को गंभीर चोट नहीं आई।

पलंग पर गिरा छत का प्लास्टर, मासूम को लगे टुकड़े

जानकारी के मुताबिक चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 में बच्चे उपचार के लिए भर्ती थे। इसी दौरान अचानक छत का प्लास्टर टूटकर नीचे आ गिरा। प्लास्टर सीधे पलंग नंबर-19 के आसपास गिरा, जहां दो माह की बच्ची भर्ती थी।

MP School Teachers: उफनते नदी-नालों के बीच स्कूल पहुंचने से राहत, शिक्षक ले सकेंगे ऑनलाइन क्लास

अचानक हुई इस घटना से वार्ड में मौजूद परिजन और अस्पताल कर्मचारी घबरा गए। परिजनों ने तत्काल बच्ची को संभाला। प्लास्टर के कुछ छोटे टुकड़े बच्ची को लगने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के बाद वार्ड कराया गया खाली

Gwalior Hospital Accident: घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर चिल्ड्रन वार्ड को खाली कराया। वार्ड में भर्ती सभी 16 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि जर्जर छत से दोबारा किसी तरह की घटना न हो।अस्पताल प्रबंधन ने घटना के बाद स्थिति का जायजा लिया और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वार्ड में मरीजों की भर्ती रोकने की कार्रवाई की।

74 साल पुरानी बिल्डिंग, बार-बार सामने आ रही जर्जर हालत

कमलाराजा अस्पताल की बिल्डिंग करीब 74 साल पुरानी बताई जा रही है। पुरानी इमारत होने के कारण अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में मरम्मत की जरूरत लंबे समय से बताई जाती रही है।

बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से बिल्डिंग की मरम्मत और पुरानी वायरिंग को बदलने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक इन प्रस्तावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी है।

चार साल में शासन को भेजे गए 11 प्रस्ताव

Gwalior Hospital Accident: अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, बीते चार वर्षों में भवन की मरम्मत और दूसरी आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर 11 प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। इनमें भवन की मरम्मत के साथ पुरानी वायरिंग को बदलने जैसे महत्वपूर्ण काम भी शामिल हैं।

इसके बावजूद प्रस्तावों पर अब तक अमल नहीं होने से अस्पताल की जर्जर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चे और गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, तो भवन की सुरक्षा को लेकर समय रहते स्थायी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

2024 से अब तक 8 हादसे, 2026 में तीन बार गिरा प्लास्टर

Gwalior Hospital Accident: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक KRH में प्लास्टर गिरने समेत करीब 8 हादसे सामने आ चुके हैं। इनमें वर्ष 2026 में ही तीन बार प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बावजूद अस्पताल भवन की मरम्मत का मुद्दा गंभीर बना हुआ है। ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल में भर्ती मासूम बच्चों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

Indore Land Dispute: इंदौर में 7000 वर्गफीट पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, महिला ने जनसुनवाई में लगाई गुहार

मासूमों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

Gwalior Hospital Accident: KRH अंचल के बड़े अस्पतालों में शामिल है और यहां ग्वालियर-चंबल सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। चिल्ड्रन वार्ड में छोटे बच्चों का इलाज होता है, ऐसे में छत से प्लास्टर गिरने की घटना को सामान्य नहीं माना जा सकता।

इस घटना में बच्ची की जान बच गई, लेकिन अगर प्लास्टर का भारी हिस्सा नीचे गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था। अब जरूरत इस बात की है कि अस्पताल भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान खतरे में न पड़े।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here